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डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजे गए हॉकी लीजेंड धनराज एन पिल्लै

योगेश कुमार

डॉ धनराज एन पिल्लै, हाँ यह नई उपलब्धि है, हमारे हॉकी हीरो का। यह गौरव का क्षण है करोड़ो भारतीय के लिए, भारतीय खेल प्रेमी के लिए, भारतीय हॉकी के लिए, हॉकी खिलाड़ियों, हॉकी प्रेमी और उन लाखों धनराज पिल्लै के समर्थकों के लिए।

महात्मा गांधी जी की विरासत, सत्य, अहिंसा और शांति को जीवित रखने वाले नेल्सन मंडेला के नाम पर नेल्सन मंडेला शांति फाउंडेशन से डॉक्टरेट प्राप्त करने पर धनराज पिल्लै को ढ़ेर सारी शुभकामनायें और हार्दिक बधाई।

भारतीय हॉकी का सुनहरा इतिहास रचने वाले, गढ़ने वाले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को हॉकी खेलते न तो मैंने नही देखा है ना हीं हमारी पीढ़ी ने। लेकिन हॉकी के लिविंग लीजेंड धनराज पिल्लै को खेलते देख अपने भारतीय होने का, हॉकी खिलाड़ी होने पर गर्व होता है। धनराज पिल्लै हस्ताक्षर हैं, ध्वज वाहक हैं हमारे हॉकी की परम्परा के स्वर्णिम इतिहास का।

हॉकी मैदान पर शेर बन विपक्षी टीम को आतंकित करने वाले विलक्षण प्रतिभा के धनी धनराज मैदान के बाहर बहुत हीं शांत, मृदभाषि और सौम्य हैं।

धनराज पिल्लै दिसंबर 1989 से अगस्त 2004 के बीच कुल 339 अंतराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। धनराज एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिसने चार ओलंपिक खेलों (1992, 1996, 2000 और 2004), चार विश्व कप (1990, 1994, 1998 और 2002), चार चैंपियंस ट्राफी (1995, 1996, 2002 और 2003) और चार एशियाई खेल (1990, 1994, 1998 और 2002) में भाग लिया है।

धनराज इंग्लैंड, फ्रांस मलेसिया ढाका जर्मनी हांगकांग जैसे कई विदेशी और देशी क्लब के लिए वर्षों खेलें हैं ।

उनकी कप्तानी में भारत ने एशियाई खेल (1998) और एशिया कप (2003) में जीता है। धनराज एकमात्र ऐसे भारतीय खिलाड़ी रहे है, जिन्हें सिडनी (1994) विश्व कप के दौरान वर्ल्ड इलेवन में शामिल किया गया।

भारत का सबसे बड़े खेल अवार्ड, राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित धनराज पिल्लै को 2001 में पद्मश्री दिया गया।

धनराज पिल्लै का जन्म (जन्म 16 जुलाई 1968) को महाराष्ट्र में पूना के पास खड़की में हुआ।
अपनी माता से प्रभावित धनराज का बचपन अभाव में उस कॉलोनी में बीता जहां उनके पिता कभी मैदान की देखभाल करते थे। धनराज अपने भाईयों और साथियों के साथ टूटी लकडियों और फेंकी हुई हॉकी गेंदों से हॉकी खेलते थे। फॉर्गिव मी अम्मा’ धनराज पिल्लै पर लिखी गई बॉयोग्राफी है जिसे पत्रकार सुंदीप मिश्रा ने उनकी जीवन यात्रा को शब्दों पिरोया है।

यह सम्मान केवल धनराज को नहीं मिला हैं। यह सम्मान उन करोड़ों भारतीय का है, जिसमें अभावों के दलदल से निकल कुछ कर गुजरने का सपना देखा है, जिसमें मंजिल पर पहुँचने का जूनून जज़्बा है। यह सम्मान भारतीय हॉकी का है, जिसकी उपलब्धि इतिहास का हिस्सा बन चूका है, यह सम्मान स्वर्णिम इतिहास को पुनर्जीवित करने में जीजान से जुटे खिलाड़ियों का है।

इस सम्मान से 41 साल बाद टोक्यो 2020 में पदक के लिए लड़ रही भारतीय हॉकी टीम को जीत के लिए प्रेरणा मिलेगा।

पुनः करोड़ों भारतीय की तरफ से धनराज पिल्लै को ढ़ेर सारी शुभकामनायें और हार्दिक बधाई।

लेखक पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी, प्रशिक्षक, निर्णायक और समीक्षक हैं।

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