कोलकाता के ईडन गार्डेंस के ऐतिहासिक मैदान पर आईपीएल मैच के दौरान 27 गेंदों में नाबाद 54 रन की विस्फोटक पारी खेलकर लखनऊ सुपर जायंट्स को रोमांचक जीत दिलाने वाले मुकुल चौधरी के लिए यह सिर्फ एक शानदार मैच नहीं था, बल्कि अपने पिता के सपने को सच करने का भावुक क्षण भी था। प्लेयर ऑफ द मैच बने मुकुल ने कहा कि क्रिकेटर बनना उनके पिता का सपना था और आज उसे पूरा कर पाना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
जन्म से पहले ही तय हो गया था रास्ता : मुकुल की कहानी उसी दिन शुरू हो गई थी, जब उनका जन्म भी नहीं हुआ था। उनके पिता पहले से ही तय कर चुके थे कि उनका बेटा क्रिकेट खेलेगा। आर्थिक तंगी के कारण शुरुआत देर से हुई, लेकिन 12-13 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट को गंभीरता से अपनाया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पिता की कसम बनी सबसे बड़ी ताकत: राजस्थान के झुंझुनू के छोटे से कस्बे गुढ़ागौड़जी से निकलकर मुकुल ने सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। सीकर की एबीएस क्रिकेट एकेडमी में ट्रेनिंग लेते हुए उन्होंने लगातार मेहनत की। इसी दौरान उनके पिता ने एक सख्त कसम दी-जब तक क्रिकेटर नहीं बनोगे, गांव वापस मत आना। यही कसम मुकुल के लिए प्रेरणा बन गई और उन्होंने खुद को पूरी तरह क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया।
संघर्ष से जयपुर तक का सफर: घर के पास की छोटी अकादमी से शुरू हुआ सफर उन्हें जयपुर तक ले गया, जहां पिछले चार वर्षों में उन्होंने अपने खेल को निखारा। मुकुल मानते हैं कि बड़े स्तर पर पहुंचने के लिए घर से बाहर निकलना और संघर्ष करना जरूरी होता है।
अंडर-19 से मिला टर्निंग पॉइंट: उनके कैरियर का टर्निंग पॉइंट अंडर-19 क्रिकेट में आया, जब उत्तर प्रदेश के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद उनके पिता को यकीन हुआ कि उनका बेटा बड़ा क्रिकेटर बन सकता है। वह मुकाबला उनके कैरियर का सिर्फ दूसरा मैच था, लेकिन उसी ने उनके भविष्य की दिशा तय कर दी।
ऑक्शन में छाए, करोड़ों में बिके: आईपीएल 2026 की मिनी नीलामी में मुकुल चौधरी का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। 30 लाख के बेस प्राइस वाले इस युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज के लिए राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस ने भी दिलचस्पी दिखाई, लेकिन अंत में लखनऊ सुपर जायंट्स ने 2.60 करोड़ रुपये की बोली लगाकर उन्हें अपनी टीम में शामिल किया।
दबाव नहीं, मौके को बनाया हथियार: मैदान पर मुकुल का आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वह दबाव को बोझ नहीं, बल्कि अवसर मानते हैं। ईडन गार्डेंस में खेली गई उनकी नाबाद पारी इसका सबसे बड़ा उदाहरण रही-जहां उन्होंने आखिरी गेंद तक टिके रहने का फैसला किया और टीम को जीत दिलाई।
पहला छक्का बना आत्मविश्वास की चाबी: इस पारी में लगाए गए सात छक्कों में उनका पहला छक्का सबसे खास रहा, क्योंकि पिछले दो मैचों में वह छक्का नहीं लगा पाए थे। पहला छक्का लगते ही उनका आत्मविश्वास बढ़ा और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
आंकड़े भी दे रहे हैं गवाही: अब तक के छोटे लेकिन प्रभावशाली करियर में मुकुल ने घरेलू क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है। टी20 क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट 165 से ऊपर रहा है, जो उनके आक्रामक अंदाज को दर्शाता है।
सपनों से ‘चौधराहट’ तक की कहानी: ईडन गार्डेंस की यह पारी सिर्फ एक मैच जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, पिता के विश्वास और सपनों के साकार होने की प्रेरणादायक गाथा है-जहां जुनून और मेहनत ने मिलकर मुकुल चौधरी की ‘चौधराहट’ को दुनिया के सामने ला दिया।