लंदन, 27 अप्रैल। विश्व एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया जब केन्या के धावक सेबास्टियन सावे ने लंदन मैराथन में दो घंटे की बहुप्रतीक्षित बाधा को तोड़ते हुए नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। सावे ने 42.2 किलोमीटर की दूरी महज 1 घंटा 59 मिनट 30 सेकंड में पूरी कर खेल जगत की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक को पार कर लिया।
यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है क्योंकि अब तक आधिकारिक प्रतियोगिताओं में कोई भी धावक दो घंटे से कम समय में मैराथन पूरी नहीं कर सका था। सावे ने न केवल यह बाधा तोड़ी बल्कि 2023 में शिकागो मैराथन में केल्विन किप्टुम द्वारा बनाए गए 2:00:35 के रिकॉर्ड को पूरे 65 सेकंड से पीछे छोड़ दिया।
रेस का रोमांच: अंतिम किलोमीटर में बनाई बढ़त
लंदन की सपाट सड़कों और अनुकूल मौसम के बीच सावे ने शुरुआत से ही संतुलित गति बनाए रखी। लगभग 30 किलोमीटर तक वह इथियोपिया के योमिफ केजेलचा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ते रहे। इसके बाद उन्होंने आखिरी दो किलोमीटर में जबरदस्त तेजी दिखाई और प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए एकल बढ़त बना ली।
फिनिश लाइन के पास पहुंचते-पहुंचते दर्शकों का उत्साह चरम पर था और सावे ने तेज स्प्रिंट के साथ इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी की है जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया।
टॉप-3 ने भी तोड़ा पुराना रिकॉर्ड
इस रेस की खास बात यह रही कि शीर्ष तीनों धावकों ने पुराने विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया:
सेबास्टियन सावे (केन्या) : 1:59:30
योमिफ केजेलचा (इथियोपिया) : 1:59:41
जैकब किप्लिमो (युगांडा) : 2:00:28
यह पहली बार हुआ जब एक ही मैराथन में तीन एथलीटों ने 2:01 के अंदर समय निकाला।
महिला वर्ग में भी रिकॉर्ड
महिला वर्ग में इथियोपिया की टिगस्ट असेफा ने 2:15:41 का समय निकालते हुए महिलाओं की मैराथन में नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने अंतिम 500 मीटर में शानदार बढ़त बनाकर जीत हासिल की। यह प्रदर्शन भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।
तकनीक और ट्रेनिंग का बड़ा योगदान
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे आधुनिक ट्रेनिंग, बेहतर पोषण और उन्नत तकनीक का बड़ा योगदान है। खासकर हल्के और कार्बन-प्लेट युक्त जूतों ने धावकों की गति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, इस तकनीक को लेकर “टेक्नोलॉजी डोपिंग” की बहस भी जारी है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इसने एथलेटिक्स को एक नई दिशा दी है।
इतिहास और महत्व
मैराथन की दूरी प्राचीन ग्रीस की उस कथा से जुड़ी है जिसमें एक सैनिक युद्ध जीत की खबर देने के लिए मैराथन से एथेंस तक दौड़ा था। वर्षों से यह खेल धैर्य, सहनशक्ति और मानसिक ताकत का प्रतीक रहा है। दो घंटे की बाधा को तोड़ना लंबे समय से एथलेटिक्स की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा था। 2019 में एलियुड किपचोगे ने यह कारनामा किया था, लेकिन वह आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं था। अब सावे ने इसे आधिकारिक तौर पर संभव कर दिखाया है।