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Wednesday, December 7, 2022

बीसीए के संविधान संशोधन के मामले में संघ के अध्यक्ष पीछे हटे, याचिका लिया वापस, जिला संघों में खुशी

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पटना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के संविधान में संशोधन को लेकर संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में IA पिटीशन No.132771/2022 और 132773/2022 जो दायर किया गया था उसे वापस ले लिया है। इस पिटीशन की खबर आने के बाद बिहार क्रिकेट संघ के जिला यूनिटों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

बीसीए अध्यक्ष द्वारा इस याचिका के विरोध में बीसीए के ही नवनिर्वाचित सचिव अमित कुमार द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बीसीए के संविधान में नये सिरे से लाये गए संशोधन प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक याचिका डाली गई और न्याय की गुहार लगाई गई है। अमित कुमार की याचिका में कहा गया था कि जिस दिन बीसीए के अध्यक्ष ने कोर्ट के समक्ष मेंशन किया था उस दिन मैं सचिव पद पर कार्यरत हूं और बीसीए का संविधान में वर्णित है कि किसी भी न्यायालय में एसोसिएशन के सचिव ही वाद के लिए अधिकृत हैं। ऐसे में बीसीए अध्यक्ष द्वारा कोर्ट के समक्ष बीसीए के संविधान में संशोधन के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी। सचिव अमित कुमार द्वारा कुल 120 पेज के पिटीशन में कोर्ट के समक्ष विभिन्न तर्क देते हुए बीसीए के संविधान के संशोधन के प्रस्ताव को रद्द करते हुए 14.09.2022 के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार संविधान में संशोधन कराने हेतू समय की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश हीमा कोहली के बेंच में इस पर आज सुनवाई हो रही थी। सचिव अमित कुमार की ओर से कपिल सिब्बल बहस में हिस्सा ले रहे थे। सुनवाई के दौरान ही बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के वकील ने अपनी याचिका को वापस लेने का आग्रह किया जिसे माननीय न्यायधीशों में मान लिया गया।

इधर अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने बीसीए के इंटरनल व्हाटशग्रुप में लिखा है कि इस आवेदन को वापस लेना सामयिक और सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान है। अब 14 सितंबर, 2022 के आदेश को समाहित करते हुए बीसीए के जिला संघों के सम्मानित पदाधिकारियों से सम्यक विचारोपरांत बीसीए के संविधान मेन आवश्यक संशोधन और 9 अगस्त, 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पुन: दाखिल करते हुए अनुमति प्राप्त करने हेतु आवेदित किया जाना है।

इस मामले पर सचिव अमित कुमार ने कहा कि यह मेरी नहीं बिहार के जिला संघों के पदाधिकारियों और न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि हम सबों को न्यायालय पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में गैरसंवैधानिक कार्यों की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार जिन पदाधिकारियों को जो कार्य आवंटित है वही किया जाए तो संगठन पूरी तरीके से संवैधानिक तरीके से चलेगा और बिहार में क्रिकेट के विकास की गति भी तेज पकड़ेगी।

इधर जिला संघों के पदाधिकारियों ने खेलढाबा से बातचीत में यह तो होना ही था। जब कानून से हट कर कोई व्यक्ति काम करेगा तो उसे पीछे हटना पड़ेगा। जिला संघों के पदाधिकारियों ने कहा कि इसमें समय भी बर्बाद हुआ और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का पैसा भी। पहले से बीसीए वित्तीय दिक्कतों से गुजर रहा है और केस मुकदमा के कारण इसकी स्थिति आर्थिक रूप से और खराब हो गई है।

 

 

 

 







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