Wednesday, June 3, 2026
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सीएम सम्राट चौधरी ने एथलीट पीयूष राज को किया सम्मानित

नौ लाख का चेक प्रदान किया,जल्द ही मिलेगी पीयूष को सरकारी नौकरी

by Khel Dhaba
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पटना, 3 जून। हांगकांग में आयोजित 22वीं एशियाई अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली 4 गुणा 400 मीटर पुरुष रिले टीम के सदस्य बिहार के रोहतास जिला के रहने वाले पीयूष राज को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नौ लाख रुपए का चेक भी उन्हें प्रदान किया।

इस मौके पर सीएम सम्राट चौधरी ने पीयूष राज को शीध्र ही मेडल लाओ नौकरी पाओ नियम के अनुसार बिहार सरकार में नौकरी देने की घोषणा की। इस अवसर पर बिहार खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मु्ख्य कार्यकारी अधिकारी रवींद्रन शंकरण समेत पीयूष राज के परिवार के सदस्य मौजूद थे।

भारतीय टीम के सदस्य पीयूष राज ने इतिहास रचते हुए एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले बिहार के पहले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

पीयूष की जिंदगी ने उन्हें बहुत कम उम्र में बड़े इम्तिहानों से गुजरने पर मजबूर कर दिया। पीयूष ने परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने अपनी पीड़ा को ताकत में बदला और ट्रैक को अपना साथी बना लिया। दौड़ उनके लिए खेल नहीं, जिंदगी बदलने का रास्ता बन गई।

फरवरी 2023 में पटना के पाटलिपुत्र स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित नेशनल इंटर डिस्ट्रिक्ट जूनियर एथलेटिक्स मीट (निडजैम) पीयूष के जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। देश भर के करीब 600 जिलों से आए छह हजार से अधिक खिलाड़ियों के बीच पीयूष की रफ्तार ने विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया। फिनिश लाइन पार करते ही यह साफ हो गया कि बिहार के इस लड़के में कुछ खास है। इसके बाद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने उनकी प्रतिभा को निखारने की जिम्मेदारी उठाई। उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, पोषण और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

पिछले तीन वर्षों से पीयूष हैदराबाद में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच रमेश के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनकी ट्रेनिंग और डाइट का पूरा खर्च बिहार सरकार उठा रही है। लगातार मेहनत का परिणाम यह हुआ कि पीयूष ने जूनियर एशियन और जूनियर वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

एशियाई अंडर-20 चैंपियनशिप में पीयूष को शुरुआत में पुरुष रिले टीम के हीट मुकाबले में जगह नहीं मिली थी। भारतीय टीम ने बिना उनके 3:08.35 मिनट के समय के साथ फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल से पहले टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें अंतिम चार सदस्यीय टीम में शामिल किया। लेन नंबर सात में दौड़ रही भारतीय टीम के लिए पीयूष ने पहले धावक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने शुरुआत से ही तेज गति पकड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद रंजीत कुमार, सैय्यद साबिर और मोहम्मद अशफाक ने रफ्तार बरकरार रखी और भारत ने 3:05.54 मिनट के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। यह समय पुराने मीट रिकॉर्ड से भी बेहतर था। हालांकि चीन और कतर की टीमों ने उससे भी तेज दौड़ लगाते हुए क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीते।

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविंद्रण शंकरण ने पीयूष की उपलब्धि को राज्य के खेल इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया। उनके अनुसार पीयूष ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। रोहतास की पहाड़ियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले पीयूष आज बिहार के हजारों युवाओं के लिए उम्मीद का नया नाम बन चुके हैं। कभी जिन कदमों के सामने जिंदगी ने मुश्किलों की दीवार खड़ी कर दी थी, वही कदम आज भारत को एशिया के पोडियम तक ले गए हैं।

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