लंदन, 28 अप्रैल। आज कल कई एथलीट डोप टेस्ट से हमेशा बचने का प्रयास करते रहते हैं परंतु दो घंटे से कम समय में मैराथन पूरी करने वाले पहले धावक सबास्टियन सावे ने यह रिकॉर्ड बनाने से पहले स्वयं ही डोपिंग के कई परीक्षण करवाए। वह इसीलिए कि कल को कोई य कहे कि यह रिकॉर्ड तोड़ने में उसने किसी दवा का सहारा लिया है। उन्होंने अपने इस कार्य से दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि पूरी तरह से साफ सुथरा होकर भी प्रतिस्पर्धा की जा सकती है।
केन्या के इस 29 वर्षीय धावक ने रविवार को लंदन मैराथन में एक घंटे, 59 मिनट और 30 सेकंड का समय लेकर वह कारनामा कर दिखाया जिसे लंबे समय से असंभव माना जा रहा था।
केन्या में हाल के वर्षों में कई प्रमुख धावक डोपिंग के दोषी पाए गए जिनमें महिला मैराथन में विश्व रिकॉर्ड धारक रूथ चेपनगेटिच भी शामिल हैं जिन पर अक्टूबर में तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया था। इसलिए सावे ने अपने कोच और प्रबंधन टीम के साथ मिलकर अपने प्रदर्शन को लेकर किसी भी संदेह को दूर करने के लिए स्वेच्छा से ‘कई’ डोपिंग परीक्षण करवाए।
पिछले साल बर्लिन और लंदन मैराथन जीतने वाले सावे ने पत्रकारों से कहा कि मेरे देश में डोपिंग कैंसर बन गया है और इसलिए मैं कड़ी परीक्षण प्रक्रिया से गुजरा। सावे ने कहा कि उन्होंने और उनकी टीम ने कड़ी परीक्षण प्रक्रिया लागू करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि लोग उनकी जीत को संदेह की नजर से देखें।
उन्होंने कहा कि मैं दुनिया को दिखाना चाहता था कि हम डोपिंग के बिना भी तेज गति से दौड़कर अच्छे परिणाम हासिल कर सकते हैं। लंदन मैराथन के प्रसारण अधिकार रखने वाले बीबीसी ने बताया कि एडिडास ने सावे का 12 महीने की अवधि में नियमित रूप से परीक्षण करवाने के लिए ट्रैक एंड फील्ड की डोपिंगरोधी संस्था एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट को 50,000 डॉलर दिए थे। इसमें प्रतियोगिता से इतर 25 बार परीक्षण करवाना भी शामिल है।
सावे ने कहा कि अन्य धावकों को भी स्वेच्छा से परीक्षण करवाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे हर कोई अपने साथी एथलीट के साथ दौड़ते समय सहज महसूस करेगा क्योंकि किसी को भी यह संदेह नहीं होगा कि कोई और भी उसी चीज़ का इस्तेमाल कर रहा है जिसका वह कर रहा है। इसलिए साफ-सुथरा रहकर दौड़ना और दुनिया को यह दिखाना महत्वपूर्ण है कि प्रतिभा, कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।