
मधु शर्मा
पटना। ये अपने जमाने के स्टार विकेटकीपर थे। स्कूल से विश्वविद्यालय तक की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व किया। बिहार की ओर रणजी भी खेला। इंग्लैंड में क्रिकेट लीग खेली। नामी चैनल के लिए कमेंट्री भी की। डॉक्टरी (आर्थोपेडिक सर्जन) में इनकी उपलब्धियां के बारे में मत पूछें। इंग्लैंड के राजकुमार प्रिंस चाल्र्स सम्मानित कर चुके हैं। अभी इंग्लैंड में डॉक्टरी के साथ-साथ क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए सराहनीय काम कर रहे हैं। यह बड़ी शाख्सियत हैं डॉ अशोक पाठक। तो आइए जानते हैं इनके बारे में-
रोहतास जिले के गोविंदपुर निवासी डॉअशोक पाठक की स्कूली शिक्षा संत जेवियर्स, हजारीबाग से हुई। इसके बाद मेडिकल परीक्षा पास करने के बाद पीएमसीएच (उस समय का नाम प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज) से डॉक्टरी की पढ़ाई। उनका क्रिकेट के प्रति लगाव बचपन से था। 1966 में बिहार स्कूल टीम की कप्तानी की। पीएमसीएच में डॉक्टरी की पढ़ाई करते हुए वर्ष 1972 में पटना यूनिर्वसिटी की ओर से खेला और टीम का नेतृत्व किया। इंटर जोनल यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट में ईस्ट जोन की उपकप्तानी की। उन्होंने घरेलू टूर्नामेंटों में पटना जिला क्रिकेट टीम की कप्तानी की। रेस्ट ऑफ बिहार की ओर से खेला और 1972-73 में बिहार रणजी टीम के सदस्य रहे। डॉक्टरी की पढ़ाई ख्तम करने के बाद वो इंग्लैंड चले गए और वहां उन्होंने यॉकशायर क्रिकेट लीग में वर्ष 1980 से 84 तक खेला। वे REMNANTS CRICKET CLUB के सदस्य हैं।




डॉ अशोक पाठक की गर्मी की छुट्टियां मसूरी में कैमल बैड रोड में लिए गए किराए के मकान में बीतती थी। इस समय के उनके माता-पिता समेत पूरा परिवार यहां रहा रहता था।
क्रिकेट से उनका इतना प्रेम है कि मत पूछें। वे क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए इंग्लैंड में काम कर रहे हैं। न केवल इंग्लैंड बल्कि इंडिया के क्रिकेटर भी वहां उनके और उनके पुत्र समीर पाठक के सहयोग से चल रहे इस प्रोग्राम में ट्रेनिंग लेते हैं। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की उपज हैं पृथ्वी शॉ। इस बात को पृथ्वी शॉ ने अपने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया है।
यक्ष्मा रोग विशेषज्ञ सह समाजसेवी स्व. डॉ मुनिश्वर पाठक के पुत्र डॉ अशोक पाठक हॉल क्रिकेट क्लब के आजीवन सदस्य हैं। भारत में चल रहे कई समाजसेवी कामों में वे मदद करते रहते हैं।
अब चर्चा उनकी डॉक्टरी के बारे में
उन्होंने पीएमसीएच से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद पीजी दिल्ली से की। इसके बाद वे पढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गए। नामी आर्थोडेडिक सर्जन डॉ अशोक पाठक 2008 में ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के मुख्य वार्ताकार (Chief negotiator) रहे। चार सालों तक ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के ट्रस्टी रहे। ओवरसीज डॉक्टरों के चीफ मेंटर रहे। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन और आईएमए द्वारा फेलोशिप से नवाजा गया।
डॉ अशोक पाठक ने 1996 विश्व कप क्रिकेट के दौरान पटना में आयोजित केन्या बनाम जिंबाब्वे मैच में बीबीसी रेडियो के लिए कमेंट्री की। इन्हें क्रिकेट और डॉक्टरी के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए इंडिया इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

वर्ष 2008 में, बीबीसी टेलीविज़न (नॉर्थ) ने डॉ अशोक पाठक पर “ए जर्नी ऑफ़ होप” नामक एक डॉक्यूमेंट्री बनाई, जिसमें उत्तर बिहार में बाढ़ को कवर किया।
मेडिसिन एंड स्पोट्र्स के क्षेत्र में काम करने के लिए महामहिम द क्वीन इन द न्यू इयर्स ऑनर्स लिस्ट-2010 में इन्हें शामिल किया गया था। इन्हें ब्रिटिश साम्राज्य (एमबीई) का सदस्य नियुक्त किया गया था। यह सम्मान एक भारतीय के लिए गर्व की बात थी।
डॉ अशोक पाठक की शादी नूतन से हुई है। उनकी एक बेटी हैं जो लंदन में वकील हैं। बेटा डॉ समीर पाठक लीवर का डॉक्टर हैं और उनके क्रिकेट को बढ़ाने वाले कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाते हैं।



विदेश में रहने के बाद में भी डॉ अशोक पाठक का अपने राज्य और गांव से नाता जुड़ा हुआ है। वे यदा-कदा अपने जिला आते रहते हैं। उनके सहयोग से रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन में टीबी मरीजों के लिए मुफ्त अस्पताल चलता है।
ईस्ट यार्कशायर के बड़े शहर HULL में रहने वाले डॉ अशोक पाठक अपनी इन उपलब्धियों पर कहते हैं कि आज हम जो कुछ भी हैं और जिन ऊचाईयों पहुंचे हैं वह माता-पिता का आशीर्वाद और मातृभूमि की दुआ के कारण ही है। वे अपनी मातृभूमि को नहीं भूले हैं। वे अपने पिता स्व. स्व. डॉ मुनिश्वर पाठक और मां स्व. मां तारा पाठक की पुण्य तिथि अपने गांव आने का भरसक प्रयास करते हैं।