कोलकाता। भारत के महान फुटबॉलर, पूर्व ओलंपियन और पूर्व कोच प्रदीप कुमार बनर्जी का निधन हो गया है। वह 83 वर्ष के थे। उनके परिवार में दो पुत्रियां हैं।
प्रदीप कुमार बनर्जी भारतीय फुटबॉल में पीके बनर्जी के नाम से लोकप्रिय थे। उनके निधन से भारतीय फुटबॉल में शोक की लहर दौड़ गयी है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने बनर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। बनर्जी पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और उन्होंने कोलकाता के एक निजी अस्पताल शुक्रवार को अंतिम सांस ली।
वह पिछले दो सप्ताह से अस्पताल में आईसीयू में भर्ती थे। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा हुआ था। वह पिछले कुछ समय से निमोनिया और श्वास की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें पर्किन्सन, दिल की बीमारी और भूलने की बीमारी भी थी। वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। उनके निधन से भारतीय फुटबॉल का एक युग समाप्त हो गया।
बनर्जी 1962 में जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे। बनर्जी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ गोल दागा जिसके बदौलत भारत ने 2-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उन्हें 1961 में अर्जुन पुरस्कार और 1990 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
23 जून 1936 को जलपाईगुड़ी के बाहरी इलाके स्थित मोयनागुड़ी में जन्मे बनर्जी बंटवारे के बाद जमशेदपुर आ गए। उन्होंने भारत के लिए 85 मैच खेलकर 65 गोल किए। वह अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले खिलाड़ी थे। अर्जुन पुरस्कार की शुरुआत 1961 में हुई था और यह पुरस्कार पहली बार बनर्जी को ही दिया गया था।
बनर्जी पिछले महीने भर से सीने में इंफेक्शन से जूझ रहे थे। बीते दिनों स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें कोलकाता के मेडिका सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बनर्जी कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे और शुक्रवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्होंने रात 12 बजकर 40 मिनट पर आखिरी सांस ली।
भारत के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों में शुमार बनर्जी ने अपने करियर में कुल 45 फीफा ए क्लास मैच खेले और 14 गोल किए। वैसे उनका कैरियर 85 मैचों का था, जिनमें उन्होंने कुल 65 गोल किए। तीन एशियाई खेलों (1958 टोक्यो, 1962 जकार्ता और 1966 बैंकाक) में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पीके बनर्जी ने दो बार ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने एशियाई खेलों में भारत के लिए छह गोल किये जो एक रिकॉर्ड है।
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