होर्सेंस (डेनमार्क), 30 अप्रैल। थॉमस कप फाइनल्स के क्वार्टर फाइनल में शुक्रवार को भारत का चीनी ताइपे की मजबूत टीम से होगा और इस मुकाबले को जीतकर भारत अपने दूसरे खिताब की ओर बढ़ने की कोशिश करेगा।
भारत ने चार साल पहले अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए थॉमस कप का खिताब जीता था जो बैडमिंटन की विश्व पुरुष टीम चैंपियनशिप है। इस बार भारत ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहकर क्वार्टर फाइनल में पहुंचा है और उसका सामना चीनी ताइपे से होगा जिसने अब तक यह टूर्नामेंट नहीं जीता है।
भारत ने अपने अभियान की शुरुआत जोरदार तरीके से करते हुए कनाडा को 4-1 से हराया। टीम ने इसके बाद ऑस्ट्रेलिया का 5-0 से शिकस्त दी लेकिन चीन को कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद उसे 2-3 से हार का सामना करना पड़ा।
चीनी ताइपे की टीम काफी मजबूत नजर आ रही है जिसकी अगुवाई दुनिया के नंबर छठे नंबर के एकल खिलाड़ी चोउ टिएन चेन कर रहे हैं। उनके साथ दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी और मौजूदा ऑल इंग्लैंड चैंपियन लिन चुन-यी और दुनिया के 21वें नंबर के खिलाड़ी ची यू जेन टीम की एकल चुनौती को बेहद मजबूत बनाते हैं। युगल में ताइपे के पास चिउ सियांग चीह और वांग ची-लिन की दुनिया की 14वें तथा ली झे-हुई और यांग पो-सुआन की दुनिया की नंबर 16वें नंबर की जोड़ी है।
दूसरी ओर भारत की टीम काफी अच्छी लय में नजर आ रही है। उसके एकल और युगल दोनों ही खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप की अपनी बेहतरीन लय को यहां भी बरकरार रखा है। उस चैंपियनशिप में वह उपविजेता रहे थे। यहां उन्होंने अपने तीनों मैच जीते हैं।
भारत के दो अनुभवी खिलाड़ियों एचएस प्रणय और किदांबी श्रीकांत ने तीसरे एकल मुकाबले की जिम्मेदारी आपस में बांटी है। बुधवार को खेले गए मैच में श्रीकांत ने चीन के लू गुआंग झू के खिलाफ पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए शानदार जीत दर्ज की। प्रणय ने 2022 में भारत की खिताबी जीत के दौरान भी ऐसी ही भूमिका निभाई थी।
ऑल इंग्लैंड के फाइनल में जगह बनाने वाले लक्ष्य सेन भले ही तीन गेम वाले दो रोमांचक मुकाबले हार गए हों लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया है। अब जब उनका मुकाबला नाराओका से होगा तो भारत की जीत काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर करेगी। वह जापान के इस प्रतिद्वंद्वी से छह बार हार चुके हैं।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की युगल जोड़ी ने अपने शुरुआती दो मैच जीते,लेकिन उसके बाद वे चीन के लियांग वेई केंग और वांग चांग से करीबी मुकाबले में हार गए। सात्विक के कंधे की चोट से उबरने के बाद यह उनका पहला टूर्नामेंट था और उम्मीद है कि यह करीबी मुकाबला उन्हें नॉकआउट चरण से पहले तैयारी में मदद करेगा।
हरिहरन अमसाकरुणन और एमआर अर्जुन की दूसरी युगल जोड़ी ने भी अब तक अपने तीन में से दो मैच जीते हैं और वे भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में मदद करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वर्ष 2022 में खिताब जीतने के अलावा भारत ने 1952, 1955 और 1979 में कांस्य पदक भी जीते हैं।