पटना, 13 मई। जिलों के खेल पदाधिकारी और विभाग में पदस्थापित अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर प्रखंड से लेकर जिला व राज्य स्तर पर निर्मित और निर्माणधीन खेल संसाधानों के साथ-साथ ट्रेनिंग सेंटरों का नियमित निरीक्ष करें। यह दौरा केवल औपाचारिकता पूर्ति के लिए नहीं हो बल्कि खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ये बातें खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंदर ने विभागीय समीक्षा के दौरान निर्देश देते हुए कही।
डॉ. बी. राजेंदर ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड स्तरीय खेल मैदान, आउटडोर स्टेडियम तथा जिला स्तरीय खेल भवन-सह-व्यायामशाला का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी नियमित रूप से मैदानों पर जाएंगे, स्थानीय खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और आम नागरिकों से संवाद करेंगे तभी संबंधित क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इससे जमीनी स्तर पर उत्पन्न समस्याओं की समय पर पहचान होगी और विभाग द्वारा उनका प्रभावी समाधान भी संभव हो सकेगा।
बैठक में राज्य में खेल आधारभूत संरचना के विकास और उसके नियमित रख-रखाव को विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि केवल नए खेल परिसरों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता और सतत रखरखाव सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य विभिन्न जिलों में विशेष खेलों पर आधारित उत्कृष्टता केंद्र विकसित करना है, जहां संबंधित खेलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
उदाहरणस्वरूप किशनगंज में ताइक्वांडो, अरवल में कबड्डी तथा मधेपुरा में बैडमिंटन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने की योजना है। प्रथम चरण में जिलों में उपलब्ध वर्तमान खेल सुविधाओं का उपयोग करते हुए 6 से 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किए जाएंगे।
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने एकलव्य प्रशिक्षण केंद्रों की प्रगति की भी समीक्षा की और इसे विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने जिला खेल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी एकलव्य केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय व्यवस्था तथा खिलाड़ियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वर्तमान में राज्य में 29 एकलव्य केंद्र संचालित हैं, जहां 1250 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विभाग द्वारा मई माह के अंत तक 18 अतिरिक्त एकलव्य केंद्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे राज्य के अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण का अवसर मिल सकेगा।
इस अवसर पर बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार के युवाओं में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। कमी है तो बस सही अवसर और सुविधाओं की। एकलव्य केंद्रों का विस्तार और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना इसी दिशा में उठाए गए ठोस कदम हैं। हमारा संकल्प है कि बिहार का हर प्रतिभावान खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन करे।
बैठक के दौरान डॉ. बी. राजेंदर ने बिहार लोक सेवा आयोग से भी खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उल्लेखनीय है कि खेल पदाधिकारियों की भर्ती हेतु परीक्षाएं इसी वर्ष जनवरी माह में आयोजित की गई थीं। अपर मुख्य सचिव ने नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि खेल प्रशासन को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।