रमजान के पाक महीने में पटना के एम्स के पास चलने वाली बिहार की नामी क्रिकेट एकेडमी बिहार कैम्ब्रिज क्रिकेट एकेडमी में दावत ए इफ्तार का आयोजन हुआ। जहां पर देश की गंगा जमुनी तहज़ीब की झलक साफ नजर आई। इस दावत ए इफ्तार में हिन्दू मुस्लिम दोनों समुदाय के सैकड़ों लोगों ने शामिल होकर देश में शांति सौहार्द व आपसी भाइचारे की कामना की।
इस मौके पर पूर्व रणजी प्लेयर व एकेडमी के कोच मोहम्मद रहमतुल्लाह ने कहा कि इस्लाम में एक माह के रोजे रखना मोमिन पर फर्ज है। मुस्लिमों के लिए गुनाहों से मुक्ति और रोजी की तरक्की के लिए यह बड़ा अजमत वाला माह माना जाता है। रमजान को नेकियों या पुन्यकार्यों का मौसम-ए-बहार (बसंत) कहा गया है। रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुस्लमान अल्लाह की इबादत (उपासना) ज्यादा करता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का है। इस महीने में रोजादार को इफ्तार कराने वाले के गुनाह माफ हो जाते हैं।
एकेडमी के कोच मोहम्मद इम्तियाज आलम ने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से आपके किसी सहाबी (साथी) ने पूछा-अगर हममें से किसी के पास इतनी गुंजाइश न हो क्या करें। तो हज़रात मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया कि एक खजूर या पानी से ही इफ्तार करा दिया जाए। यह महीना मुस्तहिक लोगों की मदद करने का महीना है।
रमजान के ताल्लुक से हमें बेशुमार हदीसें मिलती हैं और हम पढ़ते और सुनते रहते हैं, लेकिन क्या हम इस पर अमल भी करते हैं। ईमानदारी के साथ हम अपना जायजा लें कि क्या वाकई हम लोग मोहताजों और नादार लोगों की वैसी ही मदद करते हैं जैसी करनी चाहिए। सिर्फ सदकए फित्र देकर हम यह समझते हैं कि हमने अपना हक अदा कर दिया है। जब अल्लाह की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करना चाहिए। अल्लाह की राह में खर्च करना अफज़ल है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दी गयी है।




