मुंबई, 31 मई। बिहार के लाल युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ‘विशेष’ प्रतिभावान खिलाड़ी हैं और वे कोच और मेंटोर (मार्गदर्शक) से भारतीय क्रिकेट में तेजी से आगे बढ़ रहे इस खिलाड़ी के नैसर्गिक खेल में हस्तक्षेप न करें तो अच्छा होगा। ये बातें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले पूर्व भारतीय दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कही।
वैभव की बैटिंग कुछ अलग
सचिन तेंदुलकर ने क्रिकइन्फो ऑनर्स में कहा कि वर्तमान समय देश ही नहीं विदेश में हर कोई वैभव सूर्यवंशी के बारे में चर्चा कर रहा है। मैंने उन्हें बल्लेबाजी करते देखा और यह शानदार अनुभव था। मेरा मतलब है कि वह वाकई में कुछ खास हैं। उनकी सिर्फ गेंद को हिट करने की क्षमता ही नहीं, बल्कि कलाई का कमाल भी मुझे बहुत प्रभावित कर गया।
वैभव करते हैं कलाई का अच्छा इस्तेमाल
तेंदुलकर ने कहा कि वैभव मैदान के हर कोने में खेलने के लिए कलाई का अच्छा इस्तेमाल करते हैं। वह गेंद को जोर से नहीं मारता। वह बाकी बल्लेबाजों की तुलना में गेंद की लाइन और लेंथ को काफी पहले समझ लेता है और आसानी से छक्का जड़ देता है।
आने वाले दिनों में खेल सकते हैं टेस्ट क्रिकेट
तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सूर्यवंशी में भविष्य में टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की प्रतिभा है, लेकिन उन्होंने इसके साथ ही कहा कि इस किशोर खिलाड़ी से उनके कैरियर की शुरुआत में ही बहुत अधिक उम्मीद करना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैं उनसे यही कहूंगा कि वे बस खुद जैसे हैं वैसे ही बने रहें। हर चीज की शुरुआत होती है। टेस्ट क्रिकेट में उम्र के साथ-साथ वह विभिन्न चुनौतियों से निपटना सीखेंगे। यह समस्या का समाधान करने की मानसिकता से जुड़ा है।
समस्याएं हमेशा बनी रहेंगी
तेंदुलकर ने कहा कि समस्याएं तो हमेशा बनी रहेंगी। आपके कैरियर की आखिरी दिन और आखिरी गेंद तक समस्याएं बनी रहेंगी। गेंदबाज आपके सामने चुनौती पेश करता है और यह आप पर निर्भर है कि आप उससे कैसे निपटते हैं।
आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं वैभव
उन्होंने कहा कि वह एक ऐसा खिलाड़ी है जिसे देखकर लगता है कि वह उसमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है। वह जानता है कि उसे क्या करना है और इसलिए मैं उसकी नैसर्गिक प्रवृत्ति के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहूंगा। तेंदुलकर का मानना है कि सहज दृष्टिकोण को बनाए रखना इस युवा खिलाड़ी के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।
वैभव को नैसर्गिक खेल खेलने दें
उन्होंने कहा कि जिस तरह से वह गेंद को देखता है और जिस तरह से वह उस पर प्रतिक्रिया करता है, अगर उसमें किसी तरह का व्यवधान डाला जाता है तो यह सबसे बड़ी चुनौती होगी। मैं उसे अपने नैसर्गिक अंदाज में खेलने की आजादी दूंगा। समय के साथ-साथ वह खेल की अन्य चुनौतियों से निपटना भी सीख जाएगा।
खेल का आनंद लीजिए, दबाव नहीं डालिए
तेंदुलकर ने कहा कि केवल मैं ही नहीं, बल्कि हर कोई उन्हें किसी न किसी स्तर पर (टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए) देखना चाहेगा। मुझे नहीं पता कि ऐसा कब होगा। इस दिग्गज बल्लेबाज ने कहा कि लेकिन किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को प्रोत्साहन की जरूरत होती है। अगर वह अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो हमें उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें उसके खेल का आनंद लेना चाहिए और उस पर का दबाव नहीं डालना चाहिए। यह (चयन करना) जिम्मेदारी उन लोगों (चयनकर्ताओं) पर छोड़ दें जिनका यह काम है।