जमुई, 26 दिसंबर। प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होता है। यह उक्ति बिहार महिला सीनियर क्रिकेट टीम की सदस्य ज्योति के लिए फिट बैठती है। विपरित परिस्थितियों में भी उसने हिम्मत नहीं हारी और दो-दो फ्रंट पर एक साथ मेहनत किया। उसके इस मेहनत का परिणाम भी सामने आया। पहली बार में ही बीपीएससी क्रेक कर अध्यापक बन गई।
दरअसल पांच वर्षों तक निरंतर सीनियर क्रिकेट बिहार महिला टीम की सदस्य रही जमुई की ज्योति अब शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देगी। बता दें कि ज्योति के पिता दयानंद प्रसाद जमुई अस्पताल में फर्मासिस्ट इंचार्ज हैं। घर की कमजोर स्थिति के बावजूद उसने बीएचयू से 2019 में बैचलर आफ फाइन आर्टस की डिग्री हासिल की। 2019 में ही उसे बिहार की सीनियर महिला टी-20 टीम में पहली बार जगह मिली। निरंतर पांच वर्षों तक स्टेट टीम की हिस्सा रही। क्रिकेट मैदान में अपना जौहर दिखाने वाली ज्योति को काफी झंझावतों का सामना पड़ा। घर से शादी का दबाव के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। अपनी पढ़ाई और क्रिकेट में अत्यधिक खर्च होने के कारण उसने बनारस और पटना में छोटी-मोटी नौकरी भी की। उसने ठान लिया था कि वह क्रिकेट खेलने के अलावा अपना जौहर दिखाएगी। यही जज्बा उसके लिए काम आया। पहली बार में ही बीपीएससी क्रेक कर अध्यापक की परीक्षा पास कर ली। 27 दिसबंर को वह पूर्णिया में अपना योगदान देगी।
ज्योति की सफलता पर बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी, उपाध्यक्ष दिलीप सिंह, सचिव जिआउल आरफीन, जमुई जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह , उपाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह , पूर्व संयुक्त सचिव राजेश कुमार , बब्बू बालोदिया आदि ने हर्ष व्यक्त किया है। अध्यक्ष ने बताया कि ज्योति काफी प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। उसने बीपीएससी क्रेक कर यह साबित कर दिया कि वह शिक्षा में भी अव्वल है।


