
एक बार फिर भारतीय हॉकी टीम से लोगों की उम्मीदें, आशाएं बढ़ गई है। यह उम्मीद और आशा गलत नहीं है। एक तो हमारा अतीत सुनहरा रहा है दूसरा, हाल के दिनों में भारतीय टीम ने विश्व की शीर्ष टीमों को हरा विश्व रैंकिंग में चौथा स्थान प्राप्त किया है।
1975 विश्व कप विजेता भारत ओलंपिक में आठ स्वर्ण पदक सहित कुल 11 पदक प्राप्त कर चुका है। स्वर्णिम अतीत की बातें बेकार हो जाएंगी, जब तक हम वर्तमान में शीर्ष प्रतियोगिताओं में पोडियम तक नहीं पहुँच पायेंगें।
हाल के दिनों में हॉकी चलाने वाली संस्था में आए बदलाव के बाद हॉकी में पैसा आया है। भारत में चैंपियंस ट्रॉफी, विश्वकप,वर्ल्ड हॉकी सीरीज, जूनियर विश्वकप और राष्ट्रमण्डल खेल जैसे बहुत सारे बड़े-बड़े प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। लेकिन उस अनुपात में हमारा ग्रासरूट हॉकी और बुनियादी सुविधा पर काम नही किया गया। स्कूल, क्लब और राज्य स्तर की हॉकी में काफी गिरावट आई है। आज उड़ीसा बड़े-बड़े आयोजन के साथ अपने राज्य में हॉकी की बुनियादी सुविधा का विकास कर रहा है। जैसा हरियाणा और पंजाब में पहले से हो रहा है। लेकिन मेरा मानना है कि जब तक देश के हर राज्य में बुनियादी सुविधा का समग्र विकास और हॉकी की लोकप्रियता नहीं बढ़ेगी, तब तक भारतीय हॉकी से बहुत ज्यादा उम्मीद करना गलत होगा।
इस विषय पर चर्चा की बहुत गुंजाईश है। लेकिन अब चर्चा करते हैं, टोक्यो ओलिंपिक में कल होने वाले भारत और न्यूजीलैंड के बीच हॉकी के आरंभिक मुकाबले की। भारतीय टीम इस मुकाबले में निश्चित रूप से जीत के साथ आगाज करना चाहेगी, जिससे टीम का मनोबल भी बढ़ेगा और टीम लय में आ जाएगी। न्यूजीलैंड के साथ अब तक हुए मुकाबले का परिणाम और मौजूदा विश्व रैंकिंग देखें तो जीत के प्रति भारत की उम्मीद गलत नहीं होगी। भारतीय टीम विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर है, वहीं न्यूजीलैंड का स्थान 12 वां है।
टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में इस बार 10 ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका यह पहला ओलंपिक है, लेकिन ज्यादातर खिलाड़ी 2016 लखनऊ जूनियर हॉकी विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रह चुके हैं।
इस टीम के चयन में अनुभव और जोश को ध्यान में रख गया है। टीम में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर पी आर श्रीजेश, अनुभवी डिफेंडर बीरेंद्र लाकड़ा, हरमनप्रीत सिंह और रूपिंदर पाल सिंह है।
मिडफील्ड में कप्तान मनप्रीत सिंह और हार्दिक का अनुभव काम आएगा। अपना तीसरा ओलंपिक खेल रहे मनप्रीत सिंह भारतीय दल के ध्वजवाहक भी हैं।
आक्रमण पंक्ति में मनदीप सिंह, ललित उपाध्याय और शमशेर पर दारोमदार होगा।
न्यूजीलैंड पर भारत के जीत के बीच स्टीफन जेनेस और हुजो इंगलिस जैसे बेहतरीन स्ट्राइकर रोड़ा बनेगे। भारतीय रक्षा पंक्ति को पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ केन रसेल से बच कर रहना होगा।
कल के अहम् मुकाबले में भारतीय टीम फिटनेस और स्कील में न्यूजीलैंड पर भारी पड़ेगा। भारत मिले मौक़े का फ़ायदा उठता है तो इस महत्वपूर्ण मुकाबले में उसे जितने से कोई नही रोक सकता।
लेखक पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी, प्रशिक्षक, निर्णायक और समीक्षक हैं।