Tuesday, February 3, 2026
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Tokyo Olympic Athletics : थ्रोअर कमलप्रीत ने फाइनल में पहुंच रचा इतिहास

by Khel Dhaba
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टोक्यो। भारतीय एथलीट कमलप्रीत कौर (Kamalpreet Kaur) ने अपने तीसरे प्रयास में 64 मीटर का बेंचमार्क छूकर टोक्यो 2020 की डिस्क्स थ्रो के फाइनल में पहुंचने में सफलता हासिल कर ली। वो ये कारनामा करने वाली आज तक की दूसरी भारतीय थ्रोअर हैं। उनसे पहले लंदन ओलंपिक खेल-2012 में कृष्णा पुनिया (Krishna Punia) ने यह सफलता हासिल की थी।

कमलप्रीत ने अपने पहले प्रयास में 60.29 मीटर, दूसरे में 60.97 मीटर और तीसरे प्रयास में सीधे क्वालिफाई करने के लिए आवश्यक 64.00 मीटर का बेंचमार्क छुआ। कमलप्रीत ने अपने ग्रुप में ही नहीं दोनों क्वालिफिकेशन ग्रुपों में ओवरऑल दूसरे नंबर पर रहते हुए फाइनल का टिकट हासिल किया है।

उनसे आगे अमेरिका की वालराये ऑलमन (Valarie Allman) ही रहीं, जिन्होंने 66.42 मीटर की थ्रो के साथ क्वालिफाई किया है। इन दोनों के अलावा दोनों ग्रुप में कोई भी एथलीट 64 मीटर का बेंचमार्क नहीं छू सका। ऐसे में कमलप्रीत (Kamalpreet) के पदक जीतने की संभावना बढ़ गई है।

इससे पहले ग्रुप-ए में एक अन्य भारतीय एथलीट Seema Punia ने 60.57 मीटर की थ्रो की थी और वे 6वें नंबर पर रही थीं। वे फाइनल में क्वालिफाई नहीं कर सकी हैं।

कमलप्रीत कौर पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब जिले के बादल गांव की रहने वाली है। बचपन में उनकी पढ़ाई कोई दिलचस्पी नहीं थी। अपने शारीरिक शिक्षा कोच के आग्रह पर कौर ने 2012 में एथलेटिक्स में भाग लिया। वह अपनी पहली स्टेट मीट में चौथे स्थान पर रहीं थी।

कौर ने 2014 में खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया और उनके गांव में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में उनका प्रारंभिक प्रशिक्षण शुरू हुआ। उसके कठोर अभ्यास और प्राकृतिक क्षमता ने जल्द ही परिणाम देने शुरू कर दिए क्योंकि वह 2016 में अंडर-18 और अंडर-20 राष्ट्रीय चैंपियन बनी। बाद में 2017 में वह 29वें विश्व विश्वविद्यालय खेलों में छठे स्थान पर रही।

24वें फेडरेशन कप सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया क्योंकि वह चक्का फेंक में 65 मीटर बाधा पार करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। गौरतलब है कि यह दूसरी बार था जब वह पोडियम के शीर्ष पर पहुंची। उन्होंने 2019 संस्करण में 60.25 मीटर चक्का फेंककर स्वर्ण पदक जीता था।

कौर भारतीय रेलवे में क्लर्क के रूप में कार्यरत हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रेलवे प्रतिनिधित्व करती हैं। 24वें फेडरेशन कप सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करने से पहले वह घबराहट और उत्तेजना के कारण तीन रातों तक नहीं सो सकी थी। कौर सीमा पुनिया को अपना आदर्श मानती है।

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