यूनानियों के अत्याधिक उत्साह के बावजूद 1896 के एथेंस ओलंपिक में व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं थी। वर्ष 1900 में 14 मई से 28 अक्टूबर तक चले इस ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले देश और खिलाड़ियों की संख्या भी संतोषजनक नहीं थी। 1900 में पेरिस में आयोजित शताब्दी के पहले और दूसरे आधुनिक ओलंपिक खेलों की स्थिति भी कुछ उसी प्रकार की थी।
आधुनिक ओलंपिक खेलों के जनक पियरे डी कुबेर्टिन के देश में हो रहे इस ओलंपिक न उनकी मदद ली गई और न ही इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की। ओलंपिक खेलों के दौरान ही यहां विश्व प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा था जिसकी वजह से न उसपर कम ध्यान दिया गया। मैदान इतना छोटा था कि एथलेटिक्स की डिस्कस थ्रो और हैमर थ्रो की स्पर्धाएं ठीक से नहीं हो पाई। कुल मिला कर एथेंस से खराब स्थिति रही। तो आइए चलिए जानते किस्से 1900 पेरिस ओलंपिक के-
कोई आधिकारिक शुरुआत नहीं हुई
इस ओलंपिक की कोई आधिकारिक शुरुआत नहीं की। इस ओलंपिक खेल में 24 देशों के 997 एथलीटों ने हिस्सा लिया जिसमें 22 महिलाएं और 975 पुरुष थे। इन खिलाड़ियों ने 19 खेलों की कुल 95 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया।
कई नये खेल जोड़े गए
इस बार फुटबॉल, वाटरपोलो, हॉकी, क्रिकेट, रस्साकसी, रग्बी, पोलो और गोल्फ के रूप में नए खेल को जोड़ा गया, लेकिन फुटबॉल, वाटरपोलो और हॉकी को ओलंपिक आगमन आधिकारिक नहीं माना गया।

केवल टेनिस और गोल्फ में हुई महिलाओं की इंट्री
महिलाओं को इस खेल में जरूर प्रतिभागिता रही पर उन्हें केवल टेनिस और गोल्फ में ही इंट्री दी गई। ग्रेट ब्रिटेन की कार्ललोटे कूपर ने महिला टेनिस की स्पर्धा जीती और पहली महिला ओलंपिक चैंपियन बनी। इन्होंने एगिनाल्ड के साथ मिश्रित युगल का खिताब भी जीता।
पदक तालिका में मेजबान फ्रांस रहा टॉप पर
1900 ओलंपिक खेलों में मेजबान फ्रांस 25 स्वर्ण पदक समेत कुल 100 पदक लेकर टॉप पर रहा। अमेरिका 20 स्वर्ण पदक समेत 48 पदक लेकर दूसरे जबकि ग्रेट ब्रिटेन 15 स्वर्ण पदक समेत 30 पदक के साथ तीसरे नंबर पर रहा।

भारत की भी रही भागीदारी
1900 ओलंपिक खेलों में भारत का एकमात्र खिलाड़ी हिस्सा लिया था। इस खिलाड़ी का नाम था नॉरमैन गिलबर्ट प्रिटकार्ड। नॉरमैन ने दो ट्रैक इवेंट 200 मीटर और 200 मीटर हर्डल में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीते। भारत के मेडल का सफर उन्ही के साथ शुरू हुआ। भारत में जन्में प्रिटकार्ड ब्रिटिश मूल के थे। नॉरमैन पिटकार्ड सिर्फ भारत की ओर से ही नहीं बल्कि एशिया की ओर से ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले पहले खिलाड़ी थे।
नहीं था कोई रिकॉर्ड
खेलों के इस महाकुंभ में तो कई एथलीट बिना यह जाने ही दिवंगत हो गए कि वे ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुके हैं। इसका एक उदाहरण हैं ब्रिटेन की मार्गारेट अबॉट। ब्रिटेन की अबॉट वर्ष 1955 में बिना इस जानकारी के ही मर गई कि ओलंपिक के इतिहास में उनका नाम दर्ज है और वह गोल्फ स्पर्धा की चैंपियन बनीं है।

यादगार चैंपियंस
खेलों के स्टार अमेरिका के एल्विन क्रेंजेलिन थे, जिन्होंने 60 मीटर, 110 मीटर बाधा दौड़, 200 मीटर बाधा दौड़ और लंबी कूद जीती थी। एक ओलंपिक में ट्रैक स्पर्धा में चार पदक जीतने का रिकॉर्ड उनका अब भी कायम है।
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सौ मीटर दौड़ का विजेता
अमेरिका के फ्रांसिस डब्लू जार्विस ने 11 सेकेंड का समय निकाल कर पुरुषों की सौ मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
पोलियो भी नहीं रोक पाया एवरि को
बचपन से पोलियो से ग्रसित रे एवरि ने कूद की तीन स्पर्धाओं का चैंपियन बन कर सभी को अचंभित कर दिया।
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क्रिकेट में चैंपियन बना ग्रेट ब्रिटेन
क्रिकेट का खिताब ग्रेट ब्रिटेन ने जीता। उसने फ्रांस को 158 रनों से पराजित किया था। इस खेल में ग्रेट ब्रिटेन की गैर राष्ट्रीय टीम ने हिस्सा लिया था।