Thursday, January 22, 2026
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Patna Cricket में समझौता के आगे बौना हुआ खिलाड़ियों का परफॉरमेंस

by Khel Dhaba
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पटना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) की लालफीताशाही और मनमानी का खामियाजा बिहार के प्रतिभावान खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। अबतक राज्य स्तर पर इस तरीके का दृश्य अकसर देखने को मिलता था लेकिन अब यह विभिन्न जिलों से बिहार की राजधानी पटना पहुंच चुका है।

बीसीए द्वारा राज्य 8 जोनल सेंटरों पर हेमन ट्रॉफी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आगे आने वाले दिनों में कितना सफल होगा यह देखने वाली बात होगी लेकिन वर्तमान में यह स्पष्ट रूप से दिखने लगा कि जिला क्रिकेट लीग मैच खेलने और बेहतर परफॉरमेंस करने से खिलाड़ियों को ज्यादा कुछ हासिल होने वाला नहीं है। बॉस और बॉस का कुनबा जो चाहेगा वह होकर रहेगा।

अब चलिए मामले को आपको विस्तार से बताते हैं। पटना जिला क्रिकेट संघ (पीडीसीए) अपने नियमावली के तहत लोकतांत्रिक पद्धति से निर्वाचित गुट ने द्वारा कराए गए पटना जिला क्रिकेट लीग में खिलाड़ियों के परफॉरमेंस के आधार पर एक टीम की घोषणा कर दी थी। लीग में किये गए प्रदर्शन व अनुभव के आधार पर टीम की कमान शशीम राठौर को सौंपी गई थी। शशीम राठौर ने इस सत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक शतक की बदौलत चार मैचों में 273 रन बना और सात विकेट चटका कर अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया है।

पीडीसीए के दूसरे गुट द्वारा एक दूसरी टीम बना दी गई। इस गुट द्वारा लीग मैचों का आयोजन भी नहीं कराया गया था। बस दो दिन का चयन ट्रायल और कुछ दिनों की ट्रेनिंग कर अपनी टीम को खेलवाने का दाव ठोंक दिया। इस सेलेक्शन ट्रायल में ज्यादात्तर उन्हीं खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया जो पीडीसीए के निर्वाचित और लीग कराने वाले गुट के लीग मैचों में खेले थे। इस गुट ने टीम की कमान कुमार मृदुल को सौपी थी।

रविवार को जहानाबाद में सेंट्रल जोन का मैच आयोजित था। दोनों गुटों के खिलाड़ी व पदाधिकारी मैच के दिन पहुंच कर अपना-अपना दावा पेश करने लगे। कारण जो रहा हो अंतत: मैच नहीं खेला गया। ऊपर से फरमान आया कि पटना जिला के सभी मैच अगले आदेश तक स्थगित कर दिये गए हैं।

इसके बाद खेल की आड़ में नया खेल शुरू हुआ। सुलह-सफाई का दौर इसके बाद से चलता रहा और अचानक आज सोशल मीडिया में बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के साथ पीडीसीए के अधिकारियों का एक फोटो टीम लिस्ट के साथ वायरल हुआ। मानो खिलाड़ियों को सांप सूंघ गए और अधिकारी जंग जीतते नजर आए।

सुलह-सफाई में बाजी जिला क्रिकेट लीग नहीं कराने वाले गुट ने मार ली। परफॉरमेंस का लोहा मनवाने वाले कप्तान शशीम राठौर अचानक घोषित लिस्ट में उपकप्तान बना दिये गए। मानो राजनीति का खेल भद्रजनों के खेल क्रिकेट पर हावी हो गया। लीग में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले यशस्वी शुक्ला को कंफर्म टिकट की जगह वेटिंग लिस्ट का टिकट थमा दिया गया। यशस्वी शुक्ला की बैटिंग की तारीफ क्रिकेट प्रशंसक से लेकर आईएएस प्रत्यय अमृत तक कर चुके हैं।

समझौते की रेल पर अधिकारी तो सवार हो गए लेकिन प्रतिभावान प्लेयर को प्रदर्शन रूपी रेल पर सवार होने नहीं दिया गया। को हुआ है। लीग नहीं कराने वाले गुट द्वारा पहले घोषित टीम लिस्ट में रिषभ राकेश, विराट पांडेय समेत कुछ और थे पर समझौते वाली टीम में जगह नहीं बना पाये। टीम में जगह उसने बनाई जिसने शायद लीग मैच खेला नहीं हो या उसका परफॉरमेंस नदारद हो या ट्रायल मैच और ट्रेनिंग में उनका परफॉरमेंस न रहा हो।

क्रिकेट जानकारों का कहना है कि क्या पीडीसीए के निर्वाचित गुट द्वारा पटना में क्रिकेट का माहौल बनाना गलत था ?। वह निर्वाचित गुट जिसके निर्वाचन में सभी क्लबों ने समर्थन किया। जानकार का कहना है कि क्या उसमें खिलाड़ियों का खेलना गलत था ? आखिर खेल कर और परफॉरम कर उन्हें क्या मिला। लोगों ने कह रहे हैं कि कुछ नहीं, एक बार फिर से परफॉरमेंस करने वाले अपने आपको ठगे महसूस कर रहे हैं।

क्रिकेट के पंडित तो सीधे बीसीए के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी समेत तमाम शासनकर्ताओं से सवाल पूछ रहे हैं कि जो काम आज किया गया इसी काम को पहले करा कर अपनी पीठ थपथपाई होती तो अच्छा होता। क्यों कुंभकर्णी नींद में सोए थे ? बीसीए के पदाधिकारी।

क्रिकेट पंडित तो कहते हैं कि बीसीए के शासनकर्ता को क्रिकेट और क्रिकेट के माहौल से लेना देना नहीं है। उनका सीधा मतलब है फूट डालो राज करो। आखिर बिहार में क्रिकेट को नजरअंदाज कर कुर्सी का खेल कबतक चलता रहेगा।

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