पटना। बिहार क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष आशुतोष नंदन सिंह ने पहली बार साफ और कड़े शब्दों में बिहार क्रिकेट संघ में पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर किए जा रहे चयन पर सवालिया निशान खड़ा किया है।
उन्होंने कहा है कि जिस तरीके से बिहार के प्रतिभावान क्रिकेटरों की अनदेखी कर बाहरी और पैरवी पुत्रों को टीम में स्थान दिया जा रहा है वह कहीं से भी बिहार क्रिकेट के सेहत के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने चयन समिति और बीसीए के पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया है कि ऐसी कौन सी परिस्थिति बन आई है कि बिहार के मुजफ्फरपुर, भागलपुर, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे जिलों के बच्चों की साफ-साफ अनदेखी की गई है। जबकि इस जिले से विकास रंजन, सरफराज (मुजफ्फरपुर), निशांत कुमार (समस्तीपुर), मोहम्मद रहमतुल्लाह, बाससुकी नाथ मिश्रा , सचिन कुमार, विकास यादव (भागलपुर), त्रिपुरारी केशव (दरभंगा) सरीखे खिलाड़ी बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं बावजूद इसके इनकी अनदेखी की गई है।
जबकि आकाश राज, शशीम राठौर, रोहित राज की भी शानदार खेल के बाद अनदेखी की गई है। उन्होंने यह भी कहा की बिहार क्रिकेट संघ का प्रदर्शन करते हुए अंडर-19 वर्ग में 700 से अधिक रन बनाने वाले पीयूष कुमार सिंह की अनदेखी कहां तक वाजिब है। वही शिवम कुमार जो कि रणजी ट्रॉफी में बिहार क्रिकेट संघ की ओर से विकेट लेने वाले द्वितीय और विजय हजारे ट्रॉफी में विकेट हासिल करने में अव्वल रहे बावजूद इसके उन्हें टीम से बाहर रखा गया है।

न जाने ऐसी कौन सी परिस्थितियां बन आयी है कि बिहार क्रिकेट संघ प्रत्यूष कुमार सिंह, विक्रांत कुमार, रोहित कुमार सिंह जैसे बाहरी राज्य के अनजान और अपरिपक्व खिलाड़ियों को टीम में स्थान देने का निर्णय ले लिया है। वहीं शशि आनंद, आदित्य सिंह, कुमार रजनीश जैसे पैरवी पुत्र को टीम में स्थान दिया गया है ?
इस मामले में न तो चयन समिति के लोग सीधे मुंह जवाब देने को तैयार हैं और ना ही पूछे जाने पर बिहार क्रिकेट संघ के आला हुक्मरान कुछ बोलने को तैयार है। ऐसे में कहने में गुरेज नहीं है कि बिहार क्रिकेट संघ कहीं न कहीं गलत रास्ते अग्रसर है। जिससे यहां के प्रतिभावान क्रिकेटरों की प्रतिभा असमय दम तोड़ने को विवश है। उन्होंने कहा कि जब बड़े जिलों की अनदेखी हो रही है तो शिवहर, सीतामढ़ी जैसे कथित छोटे जिले की सुधि कौन लेगा ? यहां के क्रिकेटर कहां अपनी प्रतिभा का डंका बजा सकेंगे ? उन्होंने कहा कि अगर बीसीए के पदाधिकारी अपनी मनमानी और तानाशाही से बाज नहीं आते हैं तो वह इस्तीफा देने को विवश होंगे ! इसके लिए सिर्फ और सिर्फ बिहार क्रिकेट संघ जिम्मेवार होगा।