Hockey Asia Cup Rajgir 2025 राजगीर की वादियों में उस शाम कुछ खास था। नालंदा की धरती ने बहुत से ऐतिहासिक पल देखे हैं, लेकिन शुक्रवार को खेल प्रेमियों के लिए जो माहौल बना, वह यादगार बन गया। हर ओर उत्साह, तालियों की गड़गड़ाहट और तिरंगे की शान। मौका था हीरो एशिया हॉकी कप 2025 के भव्य उद्घाटन का।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब राजगीर अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पहुंचे तो दर्शकों की नज़रें उसी ओर टिक गईं। स्टेडियम खचाखच भरा था, भीड़ का जोश आसमान छू रहा था। उद्घाटन से पहले उन्होंने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। राष्ट्रीय खेल दिवस पर यह दृश्य मानो श्रद्धांजलि और उत्सव—दोनों का संगम बन गया।
भारत-चीन मैच से बढ़ा रोमांच
उद्घाटन के तुरंत बाद भारत और चीन की टीमें मैदान पर उतरीं। जैसे ही राष्ट्रगान गूंजा, माहौल में एक अलग ही ऊर्जा फैल गई। मुख्यमंत्री ने दोनों देशों के खिलाड़ियों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और उनके साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाई। खिलाड़ियों की आँखों में आत्मविश्वास था, तो दर्शकों की आँखों में उम्मीदें। उद्घाटन मैच से ही यह साफ हो गया कि आने वाले दस दिन हॉकी के रोमांच से भरपूर रहने वाले हैं।
एशिया की आठ दिग्गज टीमें, एक मंच पर
इस बार के एशिया कप में भारत, जापान, चीन, मलेशिया, कज़ाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश और चीनी ताइपे जैसी टीमें मैदान में हैं। कुल 24 मैच खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का फाइनल 7 सितंबर 2025 को होगा। टूर्नामेंट से पहले निकाली गई ट्रॉफी गौरव यात्रा ने बिहार के गाँव-कस्बों से लेकर कई राज्यों तक हॉकी का जोश फैला दिया था। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पूरे एशिया का हॉकी महाकुंभ है, जिसकी धड़कनें राजगीर से गूंज रही हैं।
क्रिकेट स्टेडियम का जायजा: खेल नगरी का सपना
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन राजगीर क्रिकेट स्टेडियम का भी निरीक्षण किया। वे 5वें तल तक गए, वहाँ से पूरे परिसर का नज़ारा लिया और अधिकारियों से हर सुविधा की जानकारी ली। उनका स्पष्ट निर्देश था कि “खिलाड़ियों और दर्शकों की हर ज़रूरी सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।”
राजगीर का यह रूप अब धीरे-धीरे बदल रहा है। हॉकी स्टेडियम, क्रिकेट स्टेडियम और खेल विश्वविद्यालय—तीनों मिलकर इस क्षेत्र को खेलों की राजधानी बनाने की राह दिखा रहे हैं।
खेल और संस्कृति का संगम
राजगीर हमेशा से इतिहास और संस्कृति का केंद्र रहा है। अब यह खेलों की नई धड़कन बनता जा रहा है। जिस तरह दर्शक हाथ हिलाते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर रहे थे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खेल नगरी की परिकल्पना को साकार करने की बात कर रहे थे, वह दृश्य आने वाले समय की कहानी कह रहा था—“बिहार अब खेलों में भी अपना झंडा गाड़ने को तैयार है।”
एक यादगार शाम
जब उद्घाटन समारोह खत्म हुआ और भारत-चीन का मुकाबला शुरू हुआ, तो दर्शकों की आँखों में चमक थी। खिलाड़ियों की जुझारू भावना और स्टेडियम की गूंज देर तक महसूस की जाती रही। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट की शुरुआत नहीं थी, बल्कि बिहार की नई खेल यात्रा का आगाज़ था।