नई दिल्ली, 28 जनवरी। भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने सभी मान्यता प्राप्त नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे राज्य प्रतीक, मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के लोगो या प्रतीक चिन्हों का अनधिकृत इस्तेमाल तुरंत बंद करें।
मंत्रालय के अनुसार, यह पाया गया है कि कुछ एनएसएफ अपने लेटरहेड, वेबसाइट, विजिटिंग कार्ड और अन्य आधिकारिक व डिजिटल संचार माध्यमों पर सरकारी लोगो और प्रतीकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे यह भ्रम पैदा हो रहा है कि संबंधित एनएसएफ सीधे तौर पर भारत सरकार या साई का हिस्सा हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के खिलाफ है यह उपयोग
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह का इस्तेमाल राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 के प्रावधानों का उल्लंघन है। हालांकि एनएसएफ को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और वे वित्तीय व अन्य सहायता के पात्र होते हैं, लेकिन इससे उन्हें भारत सरकार, मंत्रालय या साई के नाम, प्रतीक चिन्ह या लोगो को अपनी स्थायी आधिकारिक पहचान के रूप में इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं मिल जाता।
केवल टेक्स्ट में मान्यता का उल्लेख करने की अनुमति
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि एनएसएफ बिना किसी सरकारी लोगो या प्रतीक चिन्ह के केवल टेक्स्ट के रूप में यह उल्लेख कर सकते हैं कि उन्हें मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है।
इवेंट-विशिष्ट सामग्री में सीमित उपयोग की छूट
सरकार और साई के लोगो का इस्तेमाल केवल इवेंट-विशिष्ट प्रचार सामग्री जैसे बैनर, बैकड्रॉप, विज्ञापन, साइनेज या स्मृति चिन्हों में ही किया जा सकता है, वह भी तभी जब संबंधित कार्यक्रम को औपचारिक मान्यता या वित्तीय सहायता प्रदान की गई हो और निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन किया गया हो।
सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश
मंत्रालय ने सभी एनएसएफ को आदेश दिया है कि वे अपने फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से अनधिकृत लोगो को तुरंत हटाएं और यह सुनिश्चित करें कि भारत सरकार या साई के साथ उनके संबंधों को किसी भी तरह से भ्रामक रूप में प्रस्तुत न किया जाए।
राज्य इकाइयों तक पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
एनएसएफ के अध्यक्षों और महासचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अपनी संबद्ध राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इकाइयों द्वारा भी इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
उल्लंघन पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में मौजूदा दिशानिर्देशों और लागू कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें मान्यता रद्द करना या वित्तीय सहायता रोकना भी शामिल है।