पटना: बिहार के डीजीपी के आदेश पर पुलिस महानिरीक्षक, केंद्रीय प्रक्षेत्र, पटना द्वारा सिटी एसपी (पश्चिमी) के नेतृत्व में गठित त्रिसदस्यीय कमिटी ने बिहार क्रिकेट संघ (बीसीए) के विरुद्ध दर्ज तीन एफआईआर को फाइनल किए जाने के निर्णय की समीक्षा की। यह कमिटी आदित्य वर्मा के आवेदन पर गठित की गई थी।
कमिटी ने बीसीए के खिलाफ दर्ज दो मामलों में पहले किए गए अनुसंधान को अपर्याप्त मानते हुए पुनः अनुसंधान की अनुशंसा की है। पहला मामला कोतवाली थाना कांड संख्या 49/23 से जुड़ा है, जिसमें बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी या फर्जी पते पर बने डोमिसाइल प्रमाण पत्र के आधार पर बिहारी खिलाड़ी बताकर बीसीसीआई के मैच खिलाने का आरोप है। इस कांड में राकेश कुमार तिवारी, दिलीप सिंह, सिद्धार्थ राज सिन्हा, विष्णु शंकर, अनंत प्रकाश सहित आठ लोगों के विरुद्ध पुनः जांच की अनुशंसा की गई है।
कमिटी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कांड में पैसों की लेन-देन से संबंधित एक ऑडियो पेन ड्राइव में उपलब्ध कराया गया था, जिसकी जांच पूर्व अनुसंधान में नहीं की गई—इसे गंभीर चूक माना गया है।

दूसरा मामला एस.के. पूरी थाना कांड संख्या 337/24 से संबंधित है, जिसमें कोषाध्यक्ष की मृत्यु और नए कोषाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद मृत कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर से बैंक से बड़ी राशि के ट्रांसफर और एक लाख रुपये की नकद निकासी के आरोप हैं। इस कांड में बैंक अधिकारियों, राकेश कुमार तिवारी और लेखापाल मनीष कुमार के विरुद्ध पुनः अनुसंधान की अनुशंसा की गई है। कमिटी ने यहां भी जांच में कई गंभीर कमियां पाई हैं।