पूर्णिया, 26 सितंबर। ऐतिहासिक डीएसए ग्राउंड शुक्रवार को क्रिकेट के रंग में सराबोर हो उठा। मौका था पूर्णिया ज़िला क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित अंडर-19 कैंप एवं ट्रायल की धमाकेदार शुरुआत का। लगभग 50 युवा खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और अपने खेल से साफ़ कर दिया कि वे भविष्य के सितारे बनने का सपना लेकर आए हैं।
श्रद्धांजलि के साथ हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत ज़िले के पूर्व खिलाड़ी और पूर्णिया क्रिकेट के समर्पित सिपाही स्व. नवीन घोष को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। पूरे मैदान में दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों की आँखों में ग़म के साथ-साथ संकल्प की चमक भी झलक रही थी कि वे इस अधूरे सफ़र को आगे बढ़ाएँगे।
मैदान पर दिखा हुनर
श्रद्धांजलि के बाद बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी का रोमांच शुरू हुआ। तेज़ गेंदबाज़ अपनी रफ़्तार से बल्लेबाज़ों को चौंकाते दिखे, तो बल्लेबाज़ों ने तकनीक और धैर्य से उनका जवाब दिया। हर चौका, हर विकेट और शानदार फील्डिंग ने दर्शकों से खूब तालियाँ बटोरीं।
पदाधिकारियों से मुलाक़ात
कैंप के दौरान हाल ही में निर्वाचित संघ के पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों से परिचय लिया और उनका हौसला बढ़ाया।
अध्यक्ष: जयंत कुमार
उपाध्यक्ष: पंकज कुमारी
सचिव: ज्ञानवर्धन
संयुक्त सचिव: दिग्विजय सिंह
कोषाध्यक्ष: मनजीत राज
इसके अलावा शरजील इसरार, विमल मुकेश, गोपी कुमार और रोहित ने भी खिलाड़ियों को प्रेरित किया। पदाधिकारियों ने भरोसा जताया कि खिलाड़ियों को न सिर्फ़ बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।

भविष्य की नर्सरी
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह कैंप सिर्फ़ ट्रायल नहीं, बल्कि भविष्य की नर्सरी है। यहाँ से तैयार खिलाड़ी आने वाले वर्षों में बिहार ही नहीं, बल्कि देश का नाम भी रोशन कर सकते हैं।
परिजन और दर्शकों का उत्साह
कैंप का गवाह बनने खिलाड़ियों के परिजन और क्रिकेट प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। हर शानदार स्ट्रोक और सधी हुई गेंदबाज़ी पर दर्शक झूम उठे। कई क्रिकेट प्रेमियों ने खिलाड़ियों की तुलना राष्ट्रीय सितारों से करते हुए उनके भविष्य को उज्ज्वल बताया।

क्रिकेट की नई पहचान
पूर्णिया ज़िला क्रिकेट संघ की यह पहल स्थानीय खिलाड़ियों के लिए सुनहरा अवसर साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कैंप से खिलाड़ियों की तकनीकी और मानसिक क्षमता मज़बूत होती है और टीम भावना के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा का जज़्बा भी विकसित होता है।

कुल मिलाकर, पूरा डीएसए ग्राउंड जोश और उमंग से गूंज उठा और साफ़ हो गया कि पूर्णिया की धरती अब सिर्फ़ धान, मखाना और मक्का की फसल के लिए ही नहीं, बल्कि क्रिकेट के नए सितारे तैयार करने के लिए भी जानी जाएगी।