नयी दिल्ली, 6 जनवरी। भारतीय खेलों की दुनिया आज एक बड़े नेता को खो चुकी है। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के पूर्व अध्यक्ष और खेल प्रशासन के दिग्गज सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को पुणे में निधन हो गया। वायु सेना के पायलट से लेकर राजनीति और खेल प्रशासन तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा।
वायु सेना से राजनीति तक का सफर
मद्रास (अब चेन्नई) में 1944 में जन्मे कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई की। 1964 से 1974 तक उन्होंने भारतीय वायु सेना में सेवा दी। पहले कमीशन पायलट और फिर प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ देने के बाद उन्होंने स्क्वाड्रन लीडर के पद से सेवानिवृत्ति ली।
उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत पुणे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हुई, जहां शरद पवार और बाद में संजय गांधी एवं राजीव गांधी के साथ उनके घनिष्ठ संबंध बने। अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस विभाजन के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बने रहते हुए 1982, 1988, 1994 और 1998 में राज्यसभा के लिए चुनाव जीते। 1995 में वे पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री भी रहे।
1996 में पुणे से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने 2004 और 2009 में वापसी कर राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की।
खेल प्रशासन में उनकी पहचान
कलमाड़ी को खेल प्रशासक के रूप में अधिक प्रसिद्धि मिली। उनका कार्यकाल 1996 से 2011 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में रहा। इस दौरान भारत ने कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी की, जिनमें शामिल हैं:
2003 के एफ्रो एशियाई खेल
2008 के राष्ट्रमंडल युवा खेल
2010 के राष्ट्रमंडल खेल
1989 और 2013 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप
उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय खेलों का पुनर्जीवन हुआ और पुणे, बेंगलुरु, चंडीगढ़, हैदराबाद और मणिपुर सहित विभिन्न शहरों में नियमित अंतराल पर राष्ट्रीय खेल आयोजित किए गए।
विवाद और सफाई
2011 में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। हालांकि, अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी।
कलमाड़ी ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के आरोपों को निराधार बताया। उनका करिश्मा और मृदुभाषी व्यक्तित्व उन्हें जनता और मीडिया की आलोचनाओं के बावजूद मजबूती से खड़ा रखता था।
भारतीय एथलेटिक्स और अंतरराष्ट्रीय पहचान
कलमाड़ी ने 1987 से 2006 तक 19 वर्षों तक भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के अध्यक्ष के रूप में सेवा दी। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में आयोजित आठ प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय ट्रैक और फील्ड सितारों को आमंत्रित किया।
1989 में दिल्ली में पहली बार एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन
2001 में एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष चुने गए
2001-2015 तक विश्व एथलेटिक्स परिषद के सदस्य रहे
2004 में नयी दिल्ली में विश्व हाफ मैराथन का आयोजन
2008 में बीजिंग में एएनओसी पुरस्कार से सम्मानित
उनके कार्यकाल में भारत ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।
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