कुंदन श्रीवास्तव, प्रमुख संवाददाता

दिल को जिस चीज की हसरत हो, अगर वो उस शख़्स को मिल जाए तो फ़िर इस क़ायनात पर उसके जैसा ख़ुशनसीब बंदा, भला और कौन होगा? सच आज उसने 22 गज के क्रिकेट ट्रैक पर जो कारकरदग़ी दिखाई है, उसे बयां करने के लिए इस वक़्त भले ही उसके ज़ुबान पर कोई लफ़्ज़ न हो,पर चेहरे पढ़ने वालों को उसके चेहरे पर मचलती खुशियों से सबकुछ पता चल चुका होगा कि आज उसने क्या हासिल किया है।
एक इनिंग में अपने हरीफ़ टीम के सारे के सारे विकेट बस पलक झपकते चटकाना और वो भी हैट्रिक के साथ, शायद उसने भी ऐसा सोचा नहीं होगा।बेशक़ दीग़र क्रिकेटर्स की तरह उसकी भी कुछ ऐसी ख़्वाहिशें रहीं होंगी,हो सकता है ऐसी हसरतों में कई-कई रातें , उसकी जागती हुई भी गुज़री होंगी, पर उपर वाले ने उसकी जिंदगी में वो दिन आज ही मुक़र्रर कर रखे थे, यक़ीन नहीं हो रहा होगा ख़ुद उसे भी। पर सच भी तो यही है और इस यादगार सच पर किसे फ़ख़्र नहीं होगा। मेरे लफ़्ज़ों के इस लब्बोलुआब के पीछे एक झांकता चेहरा छिपा है, जिसे अब किसी त ‘आर्रूफ़ की ज़रा सी भी ज़रूरत नहीं, रिकॉर्ड बुक में उसका नाम दर्ज़ हो न हो पर कल हर क्रिकेट प्रेमियों के घरों में अख़बारों के ज़रिए सुमन बनकर खिलेगा ,दमकेगा और अपनी सुगंध भी बिखेरेगा।
33.5 ओवर 20 मेडन,53 रन,10 विकेट , ये है लेफ़्ट आर्म स्पिनर सुमन कुमार का मैज़िकल बॉलिंग तर्ज़िया, जिसकी ताब न झेल सकी रजवाड़ों की टीम। अपनी मैजिकल बॉलिंग से रजवाड़ों की ख़्वाहिशों, उनकी उम्मीदों को नेस्तनाबूद करने वाले क्रिकेटर सुमन के नाम की आज हर तरफ़ जयकारे हो रही है। एक मिडिल क्लास फैमिली में पैदा लिए इस लड़के के दिल में क्रिकेट कबसे धड़कना शुरू कर दिया, शायद उसे याद नहीं, पर उसे अपने मां -बाप,अपने कोच ब्रजेश झा और बड़े भाई समान क्रिकेटर अनुकूल राय पर ज़रूर फ़ख़्र होगा जिनकी रात दिन की मेहनत आज रंग लाई है।
