टोक्यो पैरालंपिक में भारतीय पैरा एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को ऊंची कूद में मरियप्पन थंगावेलु ने सिल्वर मेडल जीता, तो वहीं शरद कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का परचम लहराया है। अब तक भारत को टोक्यो ओलंपिक में कई पदक मिल चुके हैं। रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलु ने ऊंची कूद टी42 स्पर्धा में रजत पदक जीता जबकि शरद कुमार को कांस्य पदक मिला।
भारत के शरद कुमार शुरुआत से लीड में थे। हालांकि वह 1.83 मीटर पर सफल जंप नहीं कर पाए। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी जी ने भी ट्वीट कर शरद कुमार को मेडल जीतने की बधाई दी है। मोदी जी ने अपने ट्वीट में लिखा ‘शरद कुमार ने कांस्य पदक जीतकर हर भारतीय के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, उनकी जीवन यात्रा कई लोगों को प्रेरित करेगी, उन्हें बधाई.’
आपको बता दें कि भारतीय एथलीट शरद कुमार का जन्म 1 मार्च 1992 को बिहार राज्य के पटना में हुआ था। शरद जब 2 साल के थे तो नकली पोलियो दवा लेने से उनके बाया पैर पैरालाइस हो गया। जिसके कारण वो दिव्यांग हो गए। इन्होने अपनी स्कूली शिक्षा St. Paul’s School Darjeeling से की है। इसी दौरान शरद ने 7 साल की उम्र से हाई जम्प प्रेक्टिस करना शुरू किया।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली चले गए। दिल्ली में उन्होने किरोड़ी लाल कॉलेज से पॉलिटिक्ल साईंस में अपना ग्रेजुऐशन पूरा किया। फिर उन्होने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अपना पीजी की डिग्री पूरी की। शरद कुमार ने 2014 में दक्षिण कोरिया मे सपंन्न एशियाई पैरा खेलो में एफ-42 वर्ग में खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता।
जिसके बाद शरद ने सन् 2017 में लंदन में आयोजित विश्व पैरा चैपिंयनशिप में टी-42 कैटेगरी में सिल्वर मैडल अपने नाम किया। सन् 2018 इंडोनेशिया मे आयोजित एशियाई पैरा गेम में इन्होने टी-42/63 वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन कर शीर्ष स्थान हासिल किया व स्वर्ण पदक के दावेदार बने। शरद के इस जीत पर बिहार के लोगों में काफी हर्ष हैं। हर तरफ से लोग उनके परिजनों को बधाई दें रहें हैं।