जामबहार, 3 जनवरी। ओलंपिक में पहली बार स्वर्ण पदक दिलाने वाली भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 124वीं जयंती के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रोपनी कुमारी के गांव जामबहार में अंडर-14 बालक वर्ग हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता हॉकी सिमडेगा के मार्गदर्शन और संरक्षण में स्थानीय खेल प्रेमियों द्वारा आयोजित की गई।
प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में जामबहार ग्रीन एटिन ने जामबहार ब्लू एटिन को 2-0 गोल से पराजित कर जीत दर्ज की। मुकाबले के उपरांत दोनों टीमों को हॉकी सिमडेगा की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
गांवों से ही निकलते हैं ओलंपियन : मनोज कोणबेगी
इस अवसर पर हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोणबेगी ने कहा कि यदि हम सच में जयपाल सिंह मुंडा के सपनों को साकार करना चाहते हैं तो गांवों के मैदानों और गलियों में सुबह-शाम हॉकी का अभ्यास फिर से शुरू करना होगा।
उन्होंने कहा कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा हों या माइकल किंडो, सलीमा टेटे, निक्की प्रधान — सभी इसी तरह के गांवों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। गांवों में जमीनी स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित कर ही हम ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर पोडियम फिनिश कर सकते हैं।
भूमिदाताओं का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान जामबहार गांव के खेल मैदान और विद्यालय के लिए अपनी निजी भूमि दान करने वाले धनकुवर गुड़िया और चंद्र प्रधान को अंग वस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि
प्रतियोगिता से पूर्व हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोणबेगी, कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी, मुखिया रामचंद्र मांझी, भूमिदाता, वार्ड पार्षद, गांव के खिलाड़ी, अभिभावक एवं अतिथियों ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
महान खिलाड़ी ही नहीं, महान राष्ट्रनिर्माता भी थे जयपाल सिंह मुंडा
गौरतलब है कि 3 जनवरी 1903 को जन्मे मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने अपनी कप्तानी में 1928 के ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। वे न केवल महान खिलाड़ी थे बल्कि संविधान सभा के सदस्य, स्वतंत्र भारत में पांच बार सांसद, यूपीएससी उत्तीर्ण अधिकारी और ऑक्सफोर्ड ब्लू सम्मान पाने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी भी थे।
अनुशासन और पढ़ाई पर भी जोर
हॉकी सिमडेगा के कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी ने कहा कि खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए। वहीं स्थानीय अभिभावक सहदेव मांझी ने कहा कि अब गांव में नियमित रूप से सुबह-शाम हॉकी अभ्यास कराया जाएगा ताकि भविष्य में यहां से फिर राष्ट्रीय खिलाड़ी निकल सकें।
कार्यक्रम का मंच संचालन महिमा केरकेट्टा ने किया, तकनीकी दायित्व बलदेव मांझी और सुरेंद्र प्रधान ने निभाया, जबकि अतिथियों का स्वागत सुषमा प्रधान ने किया। आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों और खेल प्रेमियों की सक्रिय भूमिका रही।