चेन्नई। बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण अपने पहले तीनों मैच गंवाने वाली सनराइजर्स हैदराबाद और किसी एक विभाग की नाकामी से अपेक्षित शुरुआत नहीं कर पाने वाली पंजाब किंग्स की टीम बुधवार को जब इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में आमने सामने होंगी तो उनकी निगाह केवल जीत पर टिकी रहेगी।
डेविड वार्नर की अगुवाई वाले सनराइजर्स की शुरुआत इस सत्र में निराशाजनक रही है। उसकी टीम ने अब तक तीन मैचों में लक्ष्य का पीछा करते हुए मामूली अंतर से अपने मैच गंवाये हैं और उसने खाता नहीं खोला है।
पंजाब की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। केएल राहुल के नेतृत्व में टीम को तीन में से दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। पंजाब ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ बड़े स्कोर वाले पहले मैच में बमुश्किल अपने स्कोर का बचाव किया था लेकिन इसके बाद चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ उसके बल्लेबाज तो दिल्ली कैपिटल्स के सामने उसके गेंदबाज अनुकूल प्रदर्शन नहीं कर पाये थे।
चेन्नई के गेंदबाजों के सामने पंजाब किंग्स की टीम आठ विकेट पर 106 रन ही बना पायी थी और उसे करारी हार का सामना करना पड़ा था।
दिल्ली के खिलाफ राहुल और उनके सलामी जोड़ीदार मयंक अग्रवाल ने पिछले साल वाली फार्म दिखायी लेकिन स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी इस मैच में नाकाम रहे और टीम 196 रन के लक्ष्य का बचाव नहीं कर पायी।
ऐसा कम ही देखने को मिलता है जबकि शमी ने चार ओवर में 50 से अधिक रन लुटाये हों। यह तेज गेंदबाज सनराइजर्स के खिलाफ इसकी भरपायी करने की कोशिश करेंगा लेकिन वार्नर और जॉनी बेयरस्टॉ ने पिछले मैच में पूर्व की तरह अच्छी शुरुआत दिलायी थी और ये दोनों शमी और उनके साथियों पर शुरू से हावी होने का प्रयास करेंगे।
अर्शदीप सिंह ने अब तक टीम के लिये अच्छी गेंदबाजी की है लेकिन आस्ट्रेलिया के झॉय रिचर्डसन और रिले मेरेडिथ प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं। इन दोनों ने तीन मैचों में 10 से अधिक की स्ट्राइक रेट से रन लुटाये हैं। पंजाब को चेपक की धीमी पिच पर एक अदद स्पिनर की कमी खल रही है।
टीम स्पिन विभाग में मुरुगन अश्विन पर निर्भर रही है लेकिन पहले दो मैचों में उनकी नाकामी के बाद टीम को जलज सक्सेना को उतारना पड़ा। जलज की आलराउंड क्षमता को देखकर टीम उन्हें आगे भी अंतिम एकादश में बनाये रख सकती है।