सिडनी। सीरीज जीतने के बाद आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मंगलवार को तीसरे और आखिरी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उतरेगी तो उसका इरादा फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे मेजबान का सूपड़ा साफ करने का होगा।
कप्तान विराट कोहली और शानदार फार्म में चल रहे हार्दिक पंड्या को 2016 की याद आ गई होगी जब वनडे श्रृंखला हारने के बाद भारत ने टी-20 में शानदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 3-0 से मात दी थी।
पहले दो वनडे हारने के बाद भारत ने कैनबरा में तीसरा वनडे जीतकर लय हासिल की। रविंद्र जडेजा जैसे हरफनमौला की गैर मौजूदगी में भी भारत ने रविवार को दूसरा टी-20 छह विकेट से जीतकर श्रृंखला अपने नाम की।
भारतीय टीम का मनोबल इससे भी बढा होगा कि मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह को आराम देकर भी भारत ने उन तीन तेज गेंदबाजों पर भरोसा किया जिनका कुल अनुभव 40 मैचों का भी नहीं है।
सीमित ओवरों में नयी गेंद संभालने वाले टी नटराजन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार पदार्पण किया और आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को उन्हें खेलने में काफी दिक्कतें आई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले मैच में फर्क बीच के ओवरों में दोनों टीमों की बल्लेबाजी भी रही।
कार्यवाहक कप्तान मैथ्यू वेड के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने लय खो दी। दूसरी ओर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने पावरप्ले के बाद कुछ बेहतरीन शॉट लगाये। चोटिल मनीष पांडे की जगह श्रेयस अय्यर को शामिल करना भी भारत के लिये अच्छा रहा।
भारत के लिये कमजोर कड़ी युजवेंद्र चहल का खराब प्रदर्शन रही। पहले टी-20 में रवींद्र जडेजा के ‘कनकशन ’विकल्प के रूप में तीन विकेट लेकर मैन आफ द मैच रहे चहल दूसरे मैच में काफी महंगे साबित हुए ।
ऑस्ट्रेलिया को नियमित कप्तान आरोन फिंच, डेविड वॉर्नर, मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस और जोश हेजलवुडकी कमी खल रही है। इन पांच में से तीन ने हालांकि पहला टी20 खेला था जो भारत ने 11 रन से जीता था।
डार्सी शॉर्ट सलामी बल्लेबाजी के तौर पर पहले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। ऐसे में मार्कस स्टोइनिस और ग्लेन मैक्सवेल पर जिम्मेदारी बढ गई है। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में अनुभव की कमी है और भारतीय बल्लेबाजों पर लगाम कसना उनके लिये आसान नहीं होगा। एडीलेड में 17 दिसंबर से शुरू हो रही टेस्ट श्रृंखला से पहले टी20 श्रृंखला में ‘क्लीन स्वीप’ भारत के लिये टॉनिक का काम करेगी ।