पटना। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के पूर्व सचिव व क्रिकेट की भलाई की लड़ाई लड़ने वाले आदित्य वर्मा ने बयान जारी कर कहा कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने ताजा क्रिया कलाप ने बिहार क्रिकेट एसोसिएन के ताबूत में अंतिम कील ठोंक दिया है।
उन्होंने कहा कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की ताजातरीन कहानी पूरे संविधान को बदल कर अब सुप्रीम कोर्ट में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष/ सचिव के रूप मे अपना हलफनामा दायर कर सुप्रीम कोर्ट से सहमति के लिए प्रर्थना किया है। बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग को पूरी तरह से अंधेरे में रख कर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के संविधान को ही पूरा बदल दिया गया है जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि राकेश कुमार तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ताक पर रखकर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के संविधान को बदला है।
उन्होंने कहा कि किसी तरीके से पहले बिहार सरकार के निबंधन कार्यालय से प्रमाण पत्र ले कर देश के सुप्रीम कोर्ट मे आ कर प्रमाण पत्र के जुगाड़ मे लग गए हैं। जो कार्य देश में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई ने नहीं किया उसे बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने कर दिया।
आदित्य वर्मा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीसीसीआई ने 3 सालों से बिहार क्रिकेट के संविधान जो उसके बेब साइट पर है वह क्या था। 3 सालो के बाद राकेश कुमार तिवारी ने हां में हां मिलाने वाले सलाहकारों के इशारे पर जो किया है वह बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के ताबूत में अंतिम कील ठोक दिया है।
आदित्य वर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है और सोमवार को बिहार के क्रिकेट शुभचिंतकों को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुझे वैसे लोगों पर तरस आ रहा है जो आज कल समर्थन पत्र बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी को सौंप रहे हैं लगता है जैसे राजनैतिक पार्टी का चुनाव होने जा रहा है।
आदित्य वर्मा ने कहा कि जो जहाज डूब रहा है आपके समर्थन से किनारा पर नहीं लगने वाला है भाईयों। समर्थन देने वालों के पास कितना वोट है। अंत में इतना ही कहा जा सकता है कि राज्य batne के बाद बिहार क्रिकेट को जो ग्रहण लगा था पता नही कब तक चलेगा।




