पटना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के शासनकर्ता ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर काम कर रहे हैं। बीसीए अपने संविधान और नियमावली के इतर हट कर जिलों के अंदर अपना पैठ बनाने में लगा हुआ है। कई जिलों से लगातार आ रही खबरों से यह स्पष्ट दिखने लगा है कि बीसीए के आगे वाले चुनाव अभी से काम करना शुरू कर दिया गया है। इसका खामियाजा बिहार क्रिकेट के साथ राज्य के उदीयमान क्रिकेटरों को भुगतना पड़ रहा है।
बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की इस असंवैधानिक नीति के कारण केवल पटना ही नहीं अन्य जिलों के क्रिकेटरों का भविष्य चौपट हो रहा है। ये बातें पटना जिला क्रिकेट एसोसिएशन (पीडीसीए) के निर्वाचित सचिव सुनील कुमार उर्फ सुनील रोहित ने आज यहां कहीं।
उन्होंने कहा कि हेमन ट्रॉफी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट में रविवार को जहानाबाद में पाटलिपुत्र जोन के अंतर्गत पटना का मुकाबला होना तय है। पटना जिला का प्रतिनिधित्व कौन करेगा इसका फैसला अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि कानूनी, संवैधानिक और नैतिक रूप से पीडीसीए अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्राणवीर के नेतृत्व वाली पीडीसीए गुट द्वारा घोषित पटना जिला क्रिकेट टीम को खेलने की इजाजत मिलनी चाहिए। श्री रोहित ने कहा कि पीडीसीए अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्राणवीर के नेतृत्व में जो वर्तमान कमेटी है वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार निर्वाचित है। पटना जिला के सभी रजिस्टर्ड क्लब इसी गुट के साथ हैं और इस गुट द्वारा चलाई जा रही पटना जिला सीनियर व जूनियर क्रिकेट लीग में सभी निबंधित टीमें खेल रही हैं।
उन्होंने कहा कि पीडीसीए के अंदर दूसरा गुट नहीं है। साजिशन कुछ व्यक्ति विशेष के लोग पीडीसीए के कार्यों में अड़गा डाल रहे हैं जो पीडीसीए अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्राणवीर की अध्यक्षता वाली गुट अब बर्दाश्त नहीं करेगा।
श्री रोहित ने कहा कि खिलाड़ियों को गुमराह करके किसी व्यक्ति के इशारे पर एक टीम बनाई गई है जिसे इस संवैधानिक गुट कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि दो दिन का ट्रायल व ट्रायल मैच करा देने से कुछ नहीं होता है। यह तो खिलाड़ियों के ऊपर निर्भर करता है कि लीग मैच किस गुट ने कराएं और उनके प्रदर्शन का आकलन किस गुट ने किया है और कौन गुट संवैधानिक रूप से जिला के अंदर क्रिकेट संचालित कर रहा है।
उन्होंने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि हमेशा न्योचित बात होनी चाहिए। कोई भी संघ या संगठन हिटलरशाही तरीके से गैर संवैधानिक प्रक्रिया अपना कर चलाया नहीं जा सकता है।
उन्होंने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों से खेल व खिलाड़ी हित में न्यायपूर्ण और संवैधानिक निर्णय का आग्रह किया है ताकि पीडीसीए से जुड़े हजारों खिलाड़ियों का भविष्य खराब होने से बच सके।






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