नई दिल्ली, 22 दिसंबर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने वनडे विश्व कप 2023 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार को अपने कैरियर का सबसे कठिन दौर बताया है। रोहित ने खुलासा किया कि अहमदाबाद में खेले गए उस फाइनल मुकाबले में हार के बाद उन्होंने संन्यास लेने पर भी विचार किया था।
घरेलू विश्व कप में भारत का शानदार सफर
घरेलू मैदान पर खेले गए वनडे विश्व कप 2023 में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था। भारत ने लगातार नौ मुकाबले जीतते हुए फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में ट्रेविस हेड के शतक के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को पराजित कर दिया।
फाइनल हार के बाद पूरी तरह टूट गए थे रोहित
मास्टर्स यूनियन के एक कार्यक्रम में रोहित शर्मा ने कहा कि फाइनल की हार के बाद मैं पूरी तरह से निराश हो गया था। मुझे लगा कि मैं अब क्रिकेट नहीं खेलना चाहता। ऐसा महसूस हो रहा था कि इस खेल ने मुझसे सब कुछ छीन लिया है।
क्रिकेट से प्यार ने दिया वापसी का हौसला
रोहित ने बताया कि उस निराशा से उबरने में उन्हें समय लगा। मैं खुद को बार-बार याद दिलाता रहा कि क्रिकेट ही वह चीज है जिससे मुझे सबसे ज्यादा प्यार है। धीरे-धीरे मैंने अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पाई और दोबारा मैदान पर लौट पाया।
व्यक्तिगत तौर पर सबसे मुश्किल दौर
रोहित शर्मा ने स्वीकार किया कि यह हार उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद पीड़ादायक थी। मैंने इस विश्व कप के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया था। 2022 में कप्तानी संभालने के बाद से ही मेरी पूरी तैयारी इसी लक्ष्य पर केंद्रित थी।
अब सिर्फ वनडे प्रारूप पर फोकस
गौरतलब है कि रोहित शर्मा टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। इस साल की शुरुआत में उन्हें वनडे कप्तानी से भी हटाया गया था, लेकिन वह अभी भी 50 ओवर के प्रारूप में खेल रहे हैं और 2027 वनडे विश्व कप तक टीम में बने रहने का लक्ष्य रखते हैं।
टी20 विश्व कप 2024 की जीत से मिली नई ऊर्जा
ऑस्ट्रेलिया से फाइनल हार के एक साल से भी कम समय बाद भारत ने रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 टी20 विश्व कप का खिताब जीता। इसके बावजूद नवंबर 2023 की हार की पीड़ा लंबे समय तक उनके मन में बनी रही।
हार से मिली बड़ी सीख
रोहित ने कहा कि जब आप किसी लक्ष्य को पाने के लिए अपना सब कुछ लगा देते हैं और नतीजा नहीं मिलता, तो टूटना स्वाभाविक है। लेकिन मुझे यह भी एहसास था कि जीवन यहीं खत्म नहीं होता। इस अनुभव ने मुझे मानसिक रूप से और मजबूत बनाया।