नवीन चंद्र मनोज
पटना, 12 जुलाई। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के तत्वावधान में सुब्रतो कप अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में बिहार की प्रतिभागिता के लिए जिला से लेकर राज्य स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। खेल प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश पत्र के अनुसार जिला स्तरीय प्रतियोगिता 1 से 11 जुलाई तक आयोजित की गई। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण के द्वारा जिला स्तरीय प्रतियोगिता में टीम प्रतिभागिता के अनुसार बिहार के 38 जिलों में बालक अंडर-17 में कुल 49 टीम, बालिका अंडर-17 में कुल 25 टीमें और बालक अंडर-15 में कुल 40 टीमों ने हिस्सा लिया। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा दिया गया यह डाटा बिहार में खेल आंदोलन और टैलेंट सर्च के नित नये-नये अभियान की घोषणा का एक चेहरा दर्शाता है। चलिए खेलढाबा.कॉम इस बारे में विस्तार से आपको बता रहा है-
अधिकांश जिलों में बिना कंपीटिशन ही आयोजन संपन्न
बिहार में जिला है कुल 38। अंडर-17 बालक वर्ग में टीम की प्रतिभागिगता हुई कुल 49 यानी जिलों की संख्या से 11 ज्यादा। यानी अधिकांश जिलों में मात्र एक टीम आयी और बिना किसी कंपीटिशन के लिए राज्य प्रतियोगिगता में खेलने की अर्हता हासिल कर ली। बालिका अंडर-17 में आयी 25 टीमें यानी जिला की संख्या से 13 कम। बालक अंडर-15 में आयी कुल 40 टीमें यानी जिला की संख्या से दो ज्यादा। कुल मिला कर यही है कि बिना कोई मैच कराये जिलों में इस प्रतियोगिता का हो गया समापन।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का क्या रहा रवैया
हाल ही में बड़े तामझाम से राज्यस्तरीय अंडर-17 व अंडर-15 बालक फुटबॉल लीग में सह आयोजक की भूमिका अदा करने वाला और खुद द्वारा कराये जाने वाले आयोजनों को सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार का हर उपाय करने वाला बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने टैलेंट सर्च के इतने बड़े अभियान आयोजन को लेकर कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया। उसके पास सुब्रतो कप के आयोजनकर्ता या खेल विभाग से चिट्ठी आई और उसे जिला खेल पदाधिकारी को अग्रसासिरत कर अपना पिंड छुड़ा लिया। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने इसे लेकर न कोई मीडिया रिलीज जारी किया और न ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसे लेकर कोई पोस्ट डाला कि इस प्रतिययोगिता में भाग लेने के पहले क्या-क्या करना होगा।
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क्या यह प्रतियोगिता टैलेंट सर्च का हिस्सा नहीं
नित नये-नये टैलेंट सर्च अभियान की बात करने वाले बिहार राज्य खेल प्राधिकरण को देश के इतने बड़ी फुटबॉल प्रतियोगिता में टैलेंट सर्च की झलक दिखलाई नहीं पड़ी। नियमानुसार प्रखंड से लेकर राज्य स्तर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में स्कूलों की प्रतिभागिता होती हैं और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण हमेशा स्कूलों से प्रतिभाओं को खोजने की हमेशा बात करता है और कई तरह के आयोजनों की रुपरेखा उसके द्वारा रोज बनाये जाते हैं फिर इसे क्यों इग्नोर किया गया।
अच्छा रहा है इस प्रतियोगिता में बिहार का इतिहास
संयुक्त बिहार में बालक अंडर-17 में संत इंग्नेसियस स्कूल (जो वर्तमान में झारखंड में है) ने कई बार इस ट्रॉफी को अपनी झोली में डाला है। हजारीबाग की टीम ने खिताब जीता है। संयुक्त बिहार में पटना का सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाईस्कूल, पटना ने इसकी राष्ट्रीय प्रतियोगिता का दो बार खिताब अपने नाम किया है। वर्ष 1973 में सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाईस्कूल, पटना ने टॉम्बिसाना एच.एस., इंफाल, मणिपुर को 2-0 से हरा कर यह खिताब जीता जबकि वर्ष 1974 में सर जी.डी. पाटलिपुत्र एच.एस., पटना, बिहार की टीम पीकेए इंस्टीट्यूशन, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल के साथ संयुक्त रूप से विजेता रहा। पटना हाईस्कूल की टीम तीन बार इसमें राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में चैंपियन होकर दिल्ली का सफर तय किया और वहां सेमीफाइनल तक पहुंचा। मध्यग्राम, पश्चिम बंगाल की टीम से हार गई थी। आर्मी ब्वायज, बिहार की टीम इस प्रतियोगिता में उपविजेता रही है।
ओलंपिक वर्ष में यह है हाल
वर्तमान में फुटबॉल का दो महाकुंभ चल रहा है। एक तरफ यूरो कप दूसरी तरफ कोपा अमेरिका। उदीयमान फुटबॉलरों से अगर आप पूछेंगे तो रोनाल्डो और मैसी बनने की बात करेगा पर ऐसे में कैसे रोनाल्डो और मैसी निकलेगा। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के टारगेट में ओलंपिक समेत कई बड़े आयोजन हैं। कोई भी प्लेयर डायरेक्ट ओलंपिक या बड़े आयोजनों में नहीं खेल लेगा। उसके शुरुआत पायदान पर ध्यान नहीं दिया जायेगा तो आगे की सीढ़ी कैसे चढ़ पायेगा।