Friday, February 27, 2026
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BCA के पूर्व प्रवक्ता संजीव मिश्र ने कहा-बीसीसीआई की मुहर या वर्मा चालीसा

by Khel Dhaba
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पटना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के पूर्व प्रवक्ता तथा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने कहा है कि क्रिकेट का सीजन शुरू होते ही बिहार में एक बार फिर से तरह-तरह की नौटंकी व नाटक शुरू हो गए हैं।

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उन्होंने कहा कि जहां एक ओर कुछ लोग वर्मा चालीसा का पाठ कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग क्रिकेट की मर्यादा को तार-तार करने में लगे हुए हैं। श्री मिश्र ने कहा कि बिहार के उदीयमान व नौनिहाल क्रिकेटरों को तरह-तरह का सबजबाग दिखा कर अपने ऊपर बीसीसीआई का लेवल लग जाने का दंभ भरा जा रहा है जिससे आज की परिस्थिति में यहां के क्रिकेटर गुमराह के रास्ते पर खड़े होने के लिए मजबूर हो गए हैं।

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उन्होंने कहा कि भारत में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) के नाम का हवाला देकर सीजन शुरू होते ही बीसीए के लोग वीरान पड़े पटना के मोइनुल हक स्टेडियम की शोभा बढ़ाने में जुट गए हैं। वहीं कई लोग शहर के ऊर्जा स्टेडियम को नई ऊर्जा देने में लगे हुए हैं। बीसीसीआई के अधिकारियों की टीम पहले भी बीसीए में व्याप्त सिर फुटव्वल पर मरहम लगाती रही है लेकिन हर बार बिहार के निर्दोष और प्रतिभावान क्रिकेटरों को जख्म झेलना पड़ा।

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श्री मिश्र ने कहा कि वर्ष 2018 में बीसीए को मान्यता के बाद कई बार बीसीसीआई के लोग बिहार का दौरा कर चुके हैं लेकिन बीसीए को ज्ञान का पाठ नहीं पढ़ा पाए। उन्होंने कहा कि एक समय जब बीसीसीआई से अधिकृत अभय कुरविला के नेतृत्व वाली टीम बीसीए में व्याप्त विवाद को सुलझाने के लिए पटना के मौर्या होटल पहुंची थी और घंटों टीम चयन के अलावा विभिन्न तरह के विवाद को सुलझाने का निर्णय ले रही थी उस समय तत्कालीन बीसीए पदाधिकारी के रूप में मैं खुद मौजूद था और अंत में हुआ वही ढाक के तीन पात से ज्यादा कुछ नहीं। उसके बाद बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा जब पटना पहुंचे थे तो विवाद सुलझा लेने का इसी तरह के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे थे लेकिन बीसीसीआई से आये चयनकर्ताओं ने विवाद को नई हवा देकर हवाई जहाज पकड़ निकल लिये।

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उन्होंने कहा कि यह तो सही है कि बीसीसीआई से बार-बार मिलने के बाद बोर्ड के अधिकारी की टीम बिहार पहुंच जाती है और पहुंचने के पहले से उनके जहाज में उड़ने तक वर्मा चालीसा का पाठ पढ़े जाते देखा गया है। मानसून के मौसम को छोड़ कर सर्दी तक वर्मा चालीसा का पाठ बंद रहता है। बिहार में एक बार फिर से लोग दम लगा-लगा कर वर्मा चालीसा का पाठ दोहरा रहे हैं और बीसीसीआई की मुहर अपनी पीठ लगवाने का दावा करते फिर रहे हैं।

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श्री मिश्र ने कहा मानो भद्र जनों का यह खेल क्रिकेट बिहार में मजाक बन कर रह गया है। किसी अन्य राज्यों में ऐसी बुरी स्थिति देखने को नहीं मिलती है। बिहार में जो अधिकारी, खिलाड़ी, अंपायर, कोच, स्कोरर, फीजियो, ट्रेनर, ग्राउंडसमैन समेत अन्य अच्छे कार्य के लिए पुरस्कृत होने चाहिए उन्हें काली कोठरी में ढकेल दिया जाता है और कोई बिहार के ऐसे चमकते सितारे के परफॉरमेंस पर मुहर मारने के लिए तैयार नहीं है। बीसीए के अंदर नये-नये निर्णय से खिलाड़ियों और सपोर्टिंग स्टॉफ के बीच एक बार फिर असमंजस की स्थिति कायम हो गई है। ऐसी परिस्थिति में बिहार में क्रिकेट का संचालन देखने का दावा करने वाले लोगों को अगर बीसीसीआई से कोई ईमेल या आदेश का पत्र प्राप्त हुआ हो तो पब्लिक इंटरेस्ट में इसे अविलंब सार्वजनिक किया जाना चाहिए न कि वर्मा चालीसा का पाठ अभी भी पढ़ना चाहिए।

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