पटना। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा ने कहा कि 4 जनवरी हमारे और बिहार क्रिकेट के लिए काफी महत्वपूर्ण है। आज से तीन साल पहले आज के ही दिन (चार जनवरी, 2018) माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्याय धीश के बेंच से सीएबी के सचिव के नाते मैं इनपरसन एपियर हो कर बहस कर बीसीसीआई को विवश कर दिया था और 18 सालों के बाद बिहार क्रिकेट की टीम को प्रथम दर्जे के मैच खेलने की मान्यता की प्राप्ति हुई थी, पर जिन्हें बिहार में क्रिकेट चलाने की जिम्मेवारी मिली वह उसे कायम नहीं रख सके।
वर्तमान व भूत काल में बिहार में क्रिकेट का संचालन करने वाली संस्था के लोगों ने संगठन को अपनी जागीदारी समझ कर चलाया। इन्हें कानून से कोई मतलब नहीं रहा और जैसे मन किया वैसे संगठन को चलाते रहे। उन्हें क्रिकेट व क्रिकेटरों की कोई चिंता नहीं रही। न इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोत्तरी हुई और इन सबों ने संगठन के संसाधनों में बढ़ोत्तरी की। इन सबों ने बस एक-दूसरे में फूट डाल कर सत्ता का मजा लिया।
उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ नहीं सुधरा। साफ-सुथरी छवि और पारदर्शिता की बात करने वाले लोग भी बिहार क्रिकेट टीम में बाहरी खिलाड़ियों को गलत तरीके से खेला रहे हैं। कोई जाली डोमेसायल, कोई जाली ऐज प्रमाण पत्र बना पदाधिकारियों की मिली भगत से खेल रहा है जिससे बिहार के जेनविन खिलाड़ियों के साथ अन्याय हो रहा है। अगर बिहार के खिलाड़ियों का भविष्य अंधकारमय कर कोई जाली ऐज प्रमाण पत्र बना कर खेला। मामला मीडिया में आने के बाद भी क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुप हैं तो इसे क्या समझा जाए।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत ही खेद की बात है कि बिहार क्रिकेट टीम के जूनियर, सीनियर पुरुष व महिला खिलाड़ियों को टीए, डीए, मैच फी नही दिया गया। इसके लिए दोषी कौन?