पटना, 28 जनवरी। राज्य में खेल गतिविधियों को नई रफ्तार देने और खेल अवसंरचना के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खेल विभाग, बिहार ने जिला खेल पदाधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। विकास भवन, पटना में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में खेल विभाग के सचिव महेन्द्र कुमार ने कहा कि अब खेल योजनाओं की प्रगति केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसका असर सीधे मैदान पर दिखाई देना चाहिए।
एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेष फोकस
बैठक में सचिव ने स्पष्ट किया कि सभी जिलों में संचालित एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्रों का नियमित, गहन और प्रभावी निरीक्षण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिला खेल पदाधिकारी स्वयं केंद्रों का भ्रमण कर खिलाड़ियों की उपस्थिति, आवासीय व्यवस्था, मेस की गुणवत्ता, तैनात प्रशिक्षकों तथा केंद्रों के समुचित संचालन की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि बिहार के सभी जिलों में एकलव्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से पुनः प्रारंभ किया गया है, जिनका सुचारू संचालन अत्यंत आवश्यक है।
एमआईएस अपडेट को लेकर सख्त निर्देश
समीक्षा बैठक में खेल विभाग के एमआईएस (Management Information System) को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया। सचिव ने कहा कि प्रत्येक जिला खेल पदाधिकारी को अपने जिले की खेल अवसंरचना—प्रखंड स्तर के आउटडोर स्टेडियम, पंचायत स्तर के खेल मैदान और जिला स्तरीय खेल भवन सह व्यायामशाला—का नियमित फील्ड निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। उन्होंने साफ किया कि यदि एमआईएस में साप्ताहिक अपडेट नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि उस सप्ताह फील्ड विजिट नहीं हुई है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
खेल मैदानों और स्टेडियमों को सक्रिय करने की योजना
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रखंड स्तर के आउटडोर स्टेडियम एवं पंचायत स्तर के खेल मैदानों की जिला-वार सूची शीघ्र ही जिला खेल पदाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी। निर्देश दिए गए कि इन अवसंरचनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन कर वहां नियमित खेल गतिविधियां शुरू की जाएं, ताकि स्थानीय नागरिकों, युवाओं और उभरते खिलाड़ियों को खेल से जोड़ा जा सके।
स्थानीय खेल संघों के साथ समन्वय पर जोर
जिला स्तर पर उपलब्ध खेल उपकरणों और सुविधाओं के अधिकतम उपयोग को लेकर सचिव ने कहा कि जिला खेल पदाधिकारी स्थानीय खेल संघों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय खेल संघों को नाममात्र के न्यूनतम शुल्क पर अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए जिला स्तरीय खेल अवसंरचना का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यही व्यवस्था खेल भवनों में संचालित व्यायामशालाओं पर भी लागू होगी।
रखरखाव और अनुशासित उपयोग की दिशा में कदम
सचिव ने कहा कि बुनियादी उपयोग शुल्क से जहां एक ओर खेल अवसंरचना के रखरखाव में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर संसाधनों का अनुशासित, नियमित और व्यापक उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला खेल पदाधिकारी इस “बड़े टास्क” को गंभीरता से लेते हुए राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।