पटना, 13 दिसंबर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) पटना में 13 दिसंबर को खेल डोपिंग जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेघनाथ साहा सेमिनार हॉल में प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चला। आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के एसटीसी पटना द्वारा बिहार ओलंपिक संघ एवं स्पोर्ट्स आउटडोर क्लब, एनआईटी पटना के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के पंजीकरण और बैठक व्यवस्था के साथ हुई। इसके बाद मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
साई एसटीसी पटना के केंद्र प्रभारी सोमेश्वर राव चव्हाण ने स्वागत भाषण में स्वच्छ, निष्पक्ष और नैतिक खेलों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने खिलाड़ियों से डोपिंग से दूर रहते हुए खेल भावना को बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. प्रभात कुमार, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण), एनआईटी पटना तथा अजय कुमार, अध्यक्ष, बिहार ओलंपिक संघ ने खिलाड़ियों में डोपिंग के प्रति जागरूकता को समय की आवश्यकता बताया और इसके दुष्परिणामों पर अपने विचार साझा किए।
तकनीकी सत्र का संचालन श्री बिजन कुमार दास, एंटी-डोपिंग विशेषज्ञ एवं नाडा प्रतिनिधि ने किया। उन्होंने एंटी-डोपिंग का परिचय, वाडा/नाडा की संरचना, प्रतिबंधित पदार्थों की सूची और सप्लीमेंट्स के सुरक्षित उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
चाय अवकाश के बाद डॉ. रवि कुमार (एमबीबीए, डीएबी, एमएनएएमएस), परामर्शदाता ऑर्थोपेडिक एवं खेल चोट सर्जन ने खेलों में चोट निवारण और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण चिकित्सा जानकारियां साझा कीं। इसके पश्चात डॉ. अरिजीत पुटटुंडा, खेल अधिकारी, एनआईटी पटना ने स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स पर व्याख्यान देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रदर्शन सुधार और चोट से बचाव पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और छात्रों ने विशेषज्ञों से अपने प्रश्न पूछे और व्यावहारिक समाधान प्राप्त किए।
अंत में श्री विजेंद्र सिंह, वुशु कोच, SAI द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का समापन समूह फोटो के साथ हुआ।
इस जागरूकता कार्यक्रम में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, छात्रों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे स्वच्छ खेल, स्वस्थ खिलाड़ी और डोपिंग मुक्त खेल संस्कृति का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित हुआ।