पटना। बीसीसीआई द्वारा आयोजित घरेलू टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी टी20 (Syed Mushtaq Ali Trophy) में इस बार एक नया नियम बनाया गया है वह है इम्पैक्ट प्लेयर (Impact Player) का नियम। इस नियम का इस्तेमाल शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के खिलाफ बिहार टीम ने भी किया। बिहार ने इस नियम के जरिए बीच मैच में अपूर्वा आनंद की जगह राघवेंद्र प्रताप को प्लेइंग-11 में शामिल किया।
शुक्रवार को बिहार का मुकाबला हिमाचल प्रदेश से इंदौर में खेला जा रहा है। मैच में प्लेइंग इलेवन में राघवेंद्र प्रताप को जगह नहीं देने के कारण बिहार में चर्चा का विषय बन गया था। अपूर्वा आनंद को प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई थी। लोगों का कहना था कि पिछले मैच में उसने बेहतर प्रदर्शन किया था तो उसे प्लेइंग इलेवन में जगह मिलनी चाहिए थी।
मैच शुरू हुआ। बिहार ने टॉस जीत कर क्षेत्ररक्षण लेने का फैसला किया। शुरुआत अच्छी रही। सलामी बल्लेबाज को अभिजीत साकेत ने 0 पर चलता किया। अपूर्वा आनंद ने भी गेंद फेंकी। एक ओवर में 14 रन दिये। इसके कुछ देर बाद बिहार ने इंपेक्ट प्लेयर का नियम लागू करते हुए राघवेंद्र प्रताप को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया। राघवेंद्र प्रताप ने अच्छी गेंदबाजी करते हुए 1 विकेट चटकाया। अपूर्वा आनंद को बाहर क्यों किया गया पता नहीं। अमूमन इसका प्रयोग ज्यादा टीमें एक पारी खत्म होने के बाद कर रहे हैं बिहार ने बीच में क्यों किया यह टीम प्रबंधन ही बता पायेगा।
क्या है यह नियम?
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी से घरेलू टी20 मैचों में ‘इम्पेक्ट प्लेयर’ नियम लागू किया है। इसके तहत टीमें रणनीतिक तौर पर अपने किसी एक खिलाड़ी को सब्स्टिट्यूट के तौर पर मैदान में उतार सकेगी। इस नियम के तहत टीमों को टॉस के वक्त अपनी प्लेइंग-11 का एलान करने के साथ-साथ चार सब्स्टिट्यूट बताने होते हैं। टीमें इन चार में से केवल एक सब्स्टिट्यूट का उपयोग कर सकेंगी। मैच के किसी भी पारी के 14वें ओवर तक टीमें सब्स्टिट्यूट को मैदान पर भेज सकती है।
इसके लिए मैदान पर मौजूद अंपायर या फोर्थ अंपायर को ओवर खत्म होने पर जानकारी देना होती है। कप्तान/हेड कोच/टीम मैनेजर में से कोई भी एक यह बात अंपायर को बता सकता है। जिस खिलाड़ी के बदले नए खिलाड़ी को भेजा जाता है, वह खिलाड़ी फिर पूरे मैच से बाहर ही रहता है। यानी वह फील्डिंग करते हुए भी नहीं देखा जा सकेगा।





