पटना की खेल संस्कृति एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास और बदलते वर्तमान के संगम का साक्षी बनने जा रही है। गर्दनीबाग स्थित ऐतिहासिक गर्दनीबाग एथलेटिक क्लब ने अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं, और इस ऐतिहासिक अवसर को केवल जश्न तक सीमित न रखकर खेल विकास, महिला सशक्तिकरण और खिलाड़ियों के सम्मान से जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
यह शताब्दी वर्ष न केवल एक संस्था की उपलब्धि है, बल्कि पटना की उस खेल परंपरा का उत्सव है जिसने पीढ़ियों को अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया है।
1924 से आज तक: एक सदी की प्रेरक यात्रा
वर्ष 1924 में स्थापित गर्दनीबाग एथलेटिक क्लब ने उस दौर में खेल गतिविधियों की नींव रखी, जब संसाधन सीमित थे और संगठित खेल संरचना विकसित नहीं हुई थी। इस क्लब ने स्थानीय युवाओं को खेल के माध्यम से अनुशासन, फिटनेस और प्रतिस्पर्धा की भावना सिखाई।
गर्दनीबाग स्थित लगभग 10 एकड़ में फैला संजय गांधी मिनी स्टेडियम वर्षों से वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, फुटबॉल, क्रिकेट और स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं का प्रमुख केंद्र रहा है। सुबह की दौड़, खिलाड़ियों का अभ्यास और स्थानीय टूर्नामेंट इस मैदान को जीवंत बनाए रखते हैं। यह केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि सामुदायिक जीवन का धड़कता केंद्र है।
शताब्दी वर्ष का उत्सव: महिला फुटबॉल टूर्नामेंट
क्लब ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर महिला खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रेखा राय मेमोरियल महिला फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह प्रतियोगिता 27 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित होगी और महिला खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करेगी।

टूर्नामेंट के मुकाबलों में विभिन्न टीमों की भागीदारी महिला फुटबॉल के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। 27 फरवरी को नरकटियागंज बनाम जी ए सी पटना का मुकाबला होगा।
28 फरवरी को रानी लक्ष्मीबाई एकेडमी का सामना गाजीपुर की टीम से होगा। 1 मार्च को फाइनल मैच खेला जाएगा, जिसमें विजेता टीम का फैसला होगा।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि पटना की खेल संस्थाएँ अब महिला खिलाड़ियों को समान अवसर देने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं।
सम्मान समारोह: विरासत को नमन
शताब्दी समारोह के दौरान गर्दनीबाग एथलेटिक क्लब से जुड़े पूर्व खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही पटना फुटबॉल संघ से पंजीकृत सीनियर डिवीजन फुटबॉल क्लबों के पदाधिकारियों को भी सम्मान प्रदान किया जाएगा।
यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस खेल संस्कृति का है जिसने वर्षों तक समाज को जोड़ने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया। पुराने खिलाड़ियों के अनुभव और संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेंगे।

जीएसी के अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर श्याम बाबू राय के अनुसार यह आयोजन खेल भावना को मजबूत करने और समाज में महिला खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने खेल प्रेमियों से अपील की है कि वे इस आयोजन में शामिल होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करें।
उन्होंने कहा कि गर्दनीबाग एथलेटिक क्लब का शताब्दी वर्ष यह साबित करता है कि स्थानीय क्लब ही खेल संस्कृति की असली आधारशिला होते हैं। इन मैदानों से निकलकर खिलाड़ी न केवल खेल में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं।
महिला फुटबॉल टूर्नामेंट जैसे आयोजन यह संकेत देते हैं कि खेल अब अधिक समावेशी हो रहे हैं। बेटियों को मैदान तक पहुंचाने की यह पहल आने वाले वर्षों में राज्य की खेल संरचना को नई दिशा दे सकती है।