बिहारशरीफ, 23 जनवरी। बिहार क्रिकेट के इतिहास में एक भावुक अध्याय जुड़ गया है। नालंदा जिले के चंडी थाना क्षेत्र के जगतपुर गांव निवासी तेज गेंदबाज, बिहार सीनियर टीम के कप्तान रहे और आईपीएल प्लेयर वीर प्रताप सिंह ने घरेलू क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा करते हुए अपने 2011 से 2025 तक के क्रिकेट सफर को जीवन का सबसे यादगार दौर बताया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर रणजी ट्रॉफी, आईपीएल और बिहार रणजी टीम की कप्तानी तक पहुंचना वीर प्रताप सिंह के संघर्ष, मेहनत और अनुशासन की मिसाल है।
गांव से राष्ट्रीय मंच तक का संघर्षपूर्ण सफर
3 मई 1992 को जन्मे वीर प्रताप सिंह ने क्रिकेट की शुरुआत सीमित संसाधनों के बीच की। गांव के मैदानों से निकलकर उन्होंने बंगाल जैसी मजबूत घरेलू टीम में जगह बनाई और अपनी सटीक लाइन-लेंथ व फिटनेस के दम पर चयनकर्ताओं का भरोसा जीता। दाएं हाथ के मध्यम गति के इस तेज गेंदबाज ने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करते हुए खुद को भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में स्थापित किया।
उन्होंने अपने कैरियर में बंगाल, छत्तीसगढ़ और बिहार का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में डेक्कन चार्जर्स, सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही।
तेंदुलकर का विकेट लेकर सुर्खियों में आये
वर्ष 2012 में डेक्कन चाजर्स की ओर से आईपीएल में खेलते हुए वीर प्रताप सिंह ने सचिन तेंदुलकर का विकेट चटकाया और उसके बाद वे सुर्खियों में आ गए।
बिहार रणजी टीम की कप्तानी
वीर प्रताप सिंह को हाल ही में बिहार रणजी टीम का कप्तान बनाया गया था। यह जिम्मेदारी उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए सौंपी गई। क्रिकेट जानकारों का मानना है कि उनकी कप्तानी में टीम को अनुशासन, रणनीतिक सोच और आत्मविश्वास मिला। यह पल बिहार क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक रहा।
आंकड़ों में वीर प्रताप सिंह का करियर
प्रथम श्रेणी क्रिकेट (FC):
51 मैचों में 116 विकेट, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 5/30, औसत 31.14। बल्लेबाजी में 833 रन और 2 अर्धशतक।
लिस्ट-ए क्रिकेट:
42 मैचों में 74 विकेट, शानदार औसत 22.45 और सर्वश्रेष्ठ 6/51।
टी20 क्रिकेट:
22 मैचों में 19 विकेट।
आईपीएल (डेक्कन चार्जर्स):
9 मैचों में 10 विकेट, सर्वश्रेष्ठ 2/31।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वीर प्रताप सिंह का योगदान मुख्य रूप से गेंदबाजी में रहा और वे लाल गेंद व लिस्ट-ए क्रिकेट के प्रभावी तेज गेंदबाज साबित हुए।
भावुक संन्यास संदेश
संन्यास की घोषणा करते हुए वीर प्रताप सिंह ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल, छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ, बिहार क्रिकेट संघ, बीसीसीआई, अपने कोचों, साथियों, आईपीएल फ्रेंचाइजी, सपोर्ट स्टाफ और विशेष रूप से एमआरएफ पेस फाउंडेशन का आभार जताया। उन्होंने अपने परिवार को करियर की “रीढ़” बताते हुए उनके बिना शर्त समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा
जगतपुर गांव से निकलकर रणजी ट्रॉफी, आईपीएल और बिहार रणजी टीम की कप्तानी तक पहुंचने वाले वीर प्रताप सिंह का सफर यह साबित करता है कि मेहनत और जज्बे के सामने सीमाएं मायने नहीं रखतीं। घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद उनका संघर्ष, योगदान और उपलब्धियां बिहार के युवा क्रिकेटरों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेंगी।
जारी रहेगा क्रिकेट का सफर
वीर प्रताप सिंह ने भले ही घरेलू क्रिकेट से संन्यास लिया है पर उनका क्रिकेट से जुड़ाव एक खिलाड़ी और एक प्रशिक्षक के रूप में रहेगा। आने वाले दिनों में वे लीजेंड लीग खेलते हुए दिखाई पड़ सकते हैं। साथ ही बंगाल क्रिकेट लीग में उनका सफर जारी रहेगा। साथ ही अपने बिहार के क्रिकेटरों को टिप्स भी देंगे।