इंतहा हो गई इंतजार की पर हिम्मत नहीं हारी है इस क्रिकेटर ने, जानें उनके बारे में

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vikash yadav

bibhuti kumar jhaविभूति कुमार झा
भागलपुर।
बांका जिला के रहने वाले वासुदेव यादव किसानी करते हैं। कभी वे भी क्रिकेट खेला करते थे। लंबे-लंबे छक्के मारना उनका शौक हुआ करता था। लोकल लेवल के अधिकारी घंटो बैठ कर उनके मैच को देखा करते थे। जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और खूब मैच जीते। अपने सपने को पूरा करने लिए वे अपने बड़े बेटे को बचपन से क्रिकेट का गुर सीखाना शुरू कर दिया जिसका परिणाम है कि वह बेटा आज उनके द्वारा सिखाए गुर की बदौलत मैदान में खूब-चौके मार रहा है और टीम बिहार में इंट्री के लिए वर्षों से दस्तक दे रहा है।

खेलढाबा.कॉम ‘बंदे में है दम’ सीरीज के अंतर्गत वासुदेव यादव और महारानी देवी के उसी बड़े बेटे विकेटकीपर बल्लेबाज विकास यादव के क्रिकेट कैरियर के बारे में बताने जा रहा है। जानिए-

मूल रूप से बांका जिला के रहने वाले विकास यादव पिता की राह पर चलते हुए बचपन से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में उन्होंने बांका जिला की ओर से खेला। पिता वासुदेव यादव ने कहा कि बेटा बांका में क्रिकेट का उतना अच्छा माहौल नहीं है तुम भागलपुर चले जाओ और विकास यादव भागलपुर चले आये। यह बात वर्ष 2004 की है।
vikash yadav bhagalpur (2)विकास यादव ने भागलपुर आकर सैंडिस कपाउंड में सुबीर मुखर्जी के अंडर में ट्रेनिंग लेना शुरू किया। वहां सीनियर क्रिकेटर आलोक कुमार ने क्रिकेट की बेहतर तकनीक सिखाई। इसके बाद विकास का क्रिकेट कैरियर दिनों-दिन बढ़ता चला गया। डिस्ट्रिक्ट लीग हो या कोई अन्य टूर्नामेंट विकास का बल्ला हमेशा बोलता और विकेट के पीछे भी खूब शिकार करते। वे वर्ष 2006 से भागलपुर जिला की ओर हेमन ट्रॉफी खेल रहे हैं और बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
vikash yadav bhagalpur (5)विकास अपने परफॉरमेंस के बारे में बताते हुए कहते हैं कि हेमन ट्रॉफी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट में वर्ष 2008 के बाद से कोई ऐसा साल नहीं है जिसमें मैंने 350 रनों का आंकड़ा पार नहीं किया हो। पिछले सीजन में कुल 402 रन बनाये। इस साल मैंने कुल 433 रन बनाये हैं जिसमें नाबाद 154 रनों की शानदार पारी भी शामिल है। दो अर्धशतक भी जमाए हैं। इस सीजन में विकेट की पीछे कुल 14 कैच भी पकड़े हैं।
vikash yadav bhagalpur (6)इसके अलावा कई अन्य टूर्नामेंटों में विकास ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कई मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज के खिताब अपने नाम किये हैं। वर्ष 2008 में हुए सनौहला में हुए एक टूर्नामेंट का जिक्र करते हुए विकास बताते हैं कि इसमें कुल 52 टीमों ने हिस्सा लिया था और मैंने उसमें मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता था।
vikash yadav bhagalpur (6)समाजशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल किये हुए विकास कहते हैं कि मैं जो कुछ भी हूं उसमें मेरे पिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मैं अपने पिता के साथ मैच खेल कर लोकल लेवल पर खूब मैच जीते हैं। इसके अलावा सुबीर मुखर्जी (मामू) और जयशंकर ठाकुर सहित भागलपुर जिला क्रिकेट संघ के सभी पदाधिकारियों व सीनियर क्रिकेटरों ने हमें आगे बढ़ाने में काफी योगदान दिया।
vikash yadav bhagalpur (6)विकास यादव ने टीएबी कॉलेज का नेतृत्व किया और अपने कॉलेज को इंटर कॉलेज टूर्नामेंट में 2007 से 2010 तक चैंपियन बनाया। इसके अलावा उन्होंने तिलका मांझी यूनिर्वसिटी की ओर से खेला और बेहतर प्रदर्शन किया है।
vikash yadav bhagalpur (1)वर्ष 2018 में हेमन ट्रॉफी में किये गए प्रदर्शन के बाद विकास को उम्मीद थी कि उनका चयन टीम बिहार में होना चाहिए पर नहीं हो पाया। वे निराश हो गया थे। सोचा कि क्रिकेट में पूरा कैरियर लगा दिया, अबतक कुछ नहीं हुआ। रोजी-रोटी के लिए कुछ करना चाहिए और भागलपुर में ही खेल सामग्री की दुकान खोल दी। इस दुकान के खुलने के बाद पिताजी गुस्सा गए बोले कि तुम अपना ध्यान क्रिकेट पर लगाओ, अभी मैं हूं।

vikash yadav-1इतने प्रदर्शन के बाद भी टीम बिहार में इंट्री नहीं होने के सवाल पर विकास कहते हैं कि मैं क्या कर सकता हूं। कभी मैं टॉप-25 रहता हूं कभी स्टैंड बाई। इसे आगे मेरी गाड़ी बढ़ ही नहीं रही हैं पर मैंने हिम्मत नहीं हारी है। मैं मेहनत करता हूं और आगे भी करता रहूंगा, कभी न कभी टीम बिहार का दरवाजा मेरे लिए जरूर खुलेगा।

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