जानिए उस हस्ती के बारे में जिनकी स्मृति में बीसीए आयोजित करता है अंडर-16 क्रिकेट टूर्नामेंट

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Bihar Cricket Team

शैलेंद्र कुमार
Shailendra kumarपटना।
लगातार दस वर्ष तक भारत के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले गेंदबाज श्यामल सिन्हा की स्मृति में हर साल बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की ओर अंडर-16 अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है। इस टूर्नामेंट में खेल कर राज्य के उदीयमान खिलाड़ी भी अपने आपको धन्य मानते हैं। खेलढाबा.कॉम आपको आज उसी महान हस्ती श्यामल सिन्हा के बारे में बता रहा है-

स्व. श्यामल सिन्हा का जन्म पटना में दस जुलाई 1930 को हुआ था। इन्हें लोग श्यामल लाल सिन्हा के नाम से भी लोग जानते थे। वर्ष 1951 से 1962-63 सत्र तक देश की प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंट में बिहार का प्रतिनिधित्व एक गेंदबाज के रूप में श्यामल सिन्हा ने किया।

सत्र 1958-59 सत्र में बंगाल के विरुद्ध खेलते हुए 29 ओवर की गेंदबाजी करते हुए 82 रन देकर 4 विकेट लिये। फिर 1960-61 सत्र में ओड़िशा पर जीत दर्ज करने वाली बिहार टीम की ओर से नौवें क्रम पर बैटिंग करते हुए अपने जीवन का उच्चतम व्यक्ति स्कोर नाबाद 34 रन बनाये थे।

पटना विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करने के दौरान ही श्यामल सिन्हा ने अपने मित्र सुजीत मुखर्जी के साथ मिल कर स्थानीय उदीयमान क्रिकेटरों को प्रशिक्षित करने के लिए कोचिंग कैंप पटना में चालू किया था। स्व. श्यामल सिन्हा को बिहार सरकार ने क्रिकेट कोच के रूप में राजकीय सेवा में बहाल किया।

श्यामल सिन्हा का निधन 32 वर्ष की आयु में 7 जून, 1963 को पटना में हुआ था। उनके निधन के बाद एकीकृत बिहार में श्यामल सिन्हा की स्मृति में अंडर-16 क्रिकेट प्रतियोगिता की शुरुआत हुई थी जो आज तक जारी है।

श्यामल सिन्हा के बारे में बताते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कोच अधिकारी मदन मोहन प्रसाद बताते हैं कि उस समय खेल विभाग शिक्षा विभाग के अंतर्गत आता था। वे वहीं कार्यरत थे। साइकिल से ही पटना के स्कूलों में घूम-घूम कर क्रिकेट का अलख जगाते थे। वे कहते हैं वे पटना लीग में वाईएमसीसी और सचिवालय स्पोट्र्स क्लब की ओर से खेला। उनकी ट्रेनिंग से कई महान क्रिकेटर अशोक तालपात्रा, असीम चक्रवर्ती, भानू, जयनारायण शर्मा, गौरीशंकर निकले। इन सबों की ट्रेनिंग पटना कॉलेजिएट स्कूल में चलती थी। उस समय पटना कॉलेजिएट स्कूल में ट्रेनिंग की बेहतर सुविधा थी।

उनकी ख्याति के बारे में बताते हुए अधिकारी मदद मोहन प्रसाद कहते हैं कि पटना में हुई सड़क दुर्घटना के बाद उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। उन्हें खून की आवश्यकता थी। खून देने वाले की लंबी फौज खड़ी हो गई। खून देने के लिए पटना के सैंकड़ों क्रिकेटर पीएमसीएच पहुंच गए पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
खेलढाबा.कॉम परिवार भी इस महान हस्ती को शत-शत नमन करता है।

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