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जमकर खेला, मन लगा कर पढ़ा और बना नवाब

मधु शर्मा
पटना। जिस समय में यह व्यक्ति क्रिकेट खेलता था उस समय यही कहा जाता था कि खेलोगे कूदोगे होगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब। पर उसी दौर में पटना के लंगरटोली में रहने वाला एक क्रिकेटर जमकर खेला, मन लगा कर पढ़ा और फिर नवाब बन गया। वर्तमान में महाराष्ट्र रेरा के अध्यक्ष हैं। उस क्रिकेटर का नाम है गौतम चटर्जी। तो आइए जानते हैं उनके बारे में-

राजधानी के लंगरटोली, रामकृष्ण मिशन लेन स्थित परमाथा कुटीर में रहने वाले स्व. सुकुमार चटर्जी व स्व. श्रीमती माया चटर्जी के दो पुत्र हैं। एक का नाम कल्याण और दूसरे का नाम गौतम चैटर्जी। गौतम चटर्जी ने अपनी स्कूली शिक्षा संत जेवियर स्कूल से शुरू की। स्कूल के दौरान से ही उनके क्रिकेट खेलने में रूचि थी। उन्होंने इसी स्कूल से 10वीं व 12वीं (सीबीएसई) की परीक्षा पास की। 12वीं की परीक्षा में उन्होंने अपने स्कूल में टॉप और पूरे बिहार में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने सायंस कॉलेज में एडमिशन लिया। यहीं से गणित विषय में स्नातक और फिर स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। दोनों परीक्षाओं में वे गोल्ड मेडलिस्ट रहे। कल्याण चटर्जी भी इंजीनियरिंग कॉलेज पटना के लिए क्रिकेट खेलते थे और स्नातक पास करने के बाद टाटा स्टील में काम करने लगे।

तेज गेंदबाज के रूप में मशहूर गौतम चटर्जी का इस दौरान क्रिकेट का ग्राफ आगे बढ़ता चला गया। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय की ओर व ईस्ट जोन की ओर खेला। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की। सायंस कॉलेज में उन्हें कोच सुधीर दास से काफी गुर सीखने को मिले। उन्होंने बिहार की ओर अंडर-22 टीम का प्रतिनिधित्व किया। 1976-77 में बिहार रणजी टीम के सदस्य रहे और ओड़िशा के खिलाफ मैच में उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट चटकाये पर अगले ही मैच में वे क्रिकेट की राजनीति के शिकार हो गए।
जमशेदपुर में बंगाल के खिलाफ खेले गए मैच से उन्हें बाहर कर दिया। वे कहते हैं कि उस समय बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में जमशेदपुर लॉबी का दबदबा था जिसका शिकार वहां से बाहर के खिलाड़ियों को भुगतना पड़ा। इसी राजनीति के शिकार के कारण कई क्रिकेटरों का कैरियर चौपट हो गया। इस झटके के बाद गौतम चटर्जी ने पढ़ाई की ओर रुख किया और वर्ष 1982 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बन गए। उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला।

आईएएस के तौर पर उन्होंने रत्नागिरी के जिलाधिकारी, मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के एडशिनल कमिश्नर, भारत सरकार के वाणिज्य विभाग में ज्वायंट डारेक्टर, महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट के सीईओ, स्लम पुनरुद्धार प्राधिकारण के सीईओ, धरावी पुनरुद्धार प्रोजेक्ट के ओएसडी, महाराष्ट्र हाउसिंग डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव, रक्षा विभाग में संयुक्त सचिव, शिपिंग मंत्रालय में महानिदेश, ट्रांसपोर्ट एंड पोर्टस डिपार्टमेंट महाराष्ट्र में अपर मुख्य सचिव पर कार्य किया।

वर्ष 2016 में सेवानिवृत के बाद उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का ओएसडी नियुक्त किया और वर्तमान समय में महाराष्ट्र रियल स्टेट रेगूलेटरी ऑथरिटी के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं।

न केवल पढ़ाई और खेल बल्कि उनकी संगीत में भी काफी रूचि है। उनका बंगाली में रवींद्र संगीत पर और हिंदी भजन भजनवाली का एक एलबम भी लांच हो चुका है। गीतकार सदा अंबालवी द्वारा लिखी गजल को उन्होंने गाया जो यूट्यूब पर उपलब्ध है।

वे रंगमंच के भी कलाकार हैं। बंगाली नाटक चिड़ियाखाना में ब्योमबख्शी और अलीबाबा में कासिम का रोल अदा किया है। अलीबाबा के हिंदी रुपांतर नाटक में भी उन्होंने काम कया। उन्होंने फिल्म ‘ जोसेफ-बार्न इन ग्रेस’ में भी काम किया। इस फिल्म ने कई अवार्ड जीते हैं।
महाराष्ट्र रेरा में गौतम चटर्जी के कामों की सराहना राज्य और केंद्र सरकार कर रही हैं। उन्होंने रेरा के नियमों का पूरा अनुपालन महाराष्ट्र में करा रखा है। इन कामों के चलते सरकार के अलावा कई अन्य संस्थानों से अवार्ड भी मिल चुका है।

अब चर्चा उनके जीवन संगिनी की
रांची विश्वविद्यालय से स्नातक पास धनबाद की रहने वाली श्वेता से वर्ष 1984 में गौतम चटर्जी के माता-पिता ने इनको वैवाहिक बंधन में बांध दिया। श्वेता वीमेंस कॉलेज धनबाद की कॉलेज क्वीन कॉन्टेस्ट की विजेता भी रह चुकी हैं। श्वेता को भी संगीत से बहुत रुचि रही है। गौतम के साथ बहुत से संगीत के प्रोग्राम में डुएट गाना भी गाने जाया करती थी।

वर्ष 1985 में ईश्वर ने इन दोनों को एक पुत्र से नवासा। यह तो तय था कि गौरव को संगीत के प्रति रुझान होगा पर उनके माता-पिता को कहीं से भी यह विश्वास नहीं था कि मैथमेटिक्स में स्नातक की डिग्री दिल्ली यूनिवर्सिटी से हासिल करने के उपरांत एवं माइका अहमदाबाद से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद और कुछ दिनों तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने के पश्चात वह म्यूजिक को ही अपना प्रोफेशन बना लेंगे। गौरव आज उभरते हुए म्यूजिक कंपोजर हैं एवं बॉलीवुड में भी म्यूजिक कंपोज करते हैं। गौरव का विवाह इशिता से हुई जो कि एक फाइनेंशियल सेक्टर में काम करती है।

बिहार क्रिकेट संघ के पूर्व सचिव अजय नारायण शर्मा कहते हैं कि गौतम जहां भी पहुंचते थे महफिल जमा देते थे। गाना गाने के बहुत ही शौकीन थे। मन्ना डे का लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे गाना बिना सुने कोई उठने नहीं देता था। वे कहते हैं कि आज के खेल और पढ़ाई को सामंजस्य बिठा कर आगे बढ़नी की सीख इस शख्स से जरूर लेनी चाहिए।

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