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कुशल राजनेता व खेल प्रशासक ही नहीं स्टार फुटबॉलर भी थे अर्जुन विक्रम शाह

सबा परवीन
बेतिया। रंग गोरा, सुंदर चेहरा, अच्छी कद काठी, रोम-रोम में शालीनता, सरल स्वभाव, खुशमिजाज, मिलनसार, नेक दिल इंसान और आकर्षक व्यक्तित्व वाले अर्जुन विक्रम शाह बिहार खेल जगत के एक प्रकाश स्तंभ थे। अर्जुन विक्रम शाह ने राज्य खेलकूद को नई दिशा दी थी। 28 फरवरी 2012 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा। अब सिर्फ यादें ही बची है। तो आइए जानते हैं एक राजनेता, खेल प्रशासक, साहित्य व सांस्कृतिक प्रेमी और उन सबसे बढ़कर बेहतर फुटबॉल खिलाड़ी अर्जुन विक्रम शाह के बारे में-

बिहार में खेलों का आयोजन करना आसान नहीं है लेकिन जब अर्जुन विक्रम शाह राज्य के पहले खेलमंत्री बने थे तब उनके प्रयास से बिहार में एक से एक आयोजन हुए। क्रिकेट फुटबॉल और कार रैली सबसे बड़ी पहचान बनी। कार रैली का जैसा आयोजन तीन बार उन्होंने कराय अब उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। इस समय पटना के कंकड़बाग में पाटलिपुत्र स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स बना है उसके लिए भूमि अधिग्रहण और शुरुआती नींव डालने का काम इन्होंने ही किया था।

रामनगर (पश्चिम चंपारण) राज परिवार में जन्में अर्जुन विक्रम शाह की शिक्षा-दीक्षा (प्रारंभिक से लेकर एमए तक) रामनगर, मोतिहारी, पटना, कोलकाता और बनारस में हुई। प्रिंस मोहन विक्रम शाह उर्फ राम राजा के पुत्र अर्जुन विक्रम शाह कई भाषाओं के जानकार थे। दिन-रात, सोते जागते फुटबॉल ही फुटबॉल की बात करने वाले अर्जुन विक्रम शाह फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी, रेफरी, कमेंटेटर, आयोजक व स्पोट्र्स प्रशासक थे।

बिहार के सबसे पुराने क्लबों में एक रामनगर क्लब से अर्जुन विक्रम शाह फुटबॉल खेलना प्रारंभ किया। सेंटर फॉरवर्ड और लिंकमैन (हाफ) पोजिशन से वे खेला करते थे। इस क्लब में अधिकतर खिलाड़ी इनके परिवार के सदस्य होते थे जिसके कारण इस टीम को राजकुमार टीम कहा जाता था। इस टीम का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। हैदराबाद निजाम क्लब व लखनऊ नवाब टीम के विरुद्ध रामनगर में आयोजित प्रदर्शनी मैच में रामनगर क्लब के खिलाड़ियों द्वारा शानदार प्रदर्शन को आज भी उस मैच के दर्शक चर्चा करते हैं। इस रामनगर क्लब के बहुत दिनों तक मैनेजर स्व. दीनानाथ वर्मा रहे।

रामनगर क्लब और फुटबॉल मैदान की तरक्की में उन्होंने बहुत काम किया। रामनगर क्लब ने महाराजा कप दरभंगा, इंडिया इंडिपेंडस कप मोतिहारी, ऑल इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट बोकारो, ऑल इंडिया मानसून टूर्नामेंट, गोरखपुर, ऑल इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट मऊ और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) व नेपाल के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भाग लिया। भूटान के विरुद्ध भी खेलने का मौका इस क्लब को मिला।

इस क्लब में पटना, रांची, जमशेदपुर, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी के भी खिलाड़ी अपनी सेवा देते थे। नेपाल के मशहूर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गणेश थापा भी इस क्लब की ओर से खेल चुके हैं। नेपाल के ही पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हरि बहादुर श्रेष्ठ (फीफा कोच) और हंस राणा भी इस क्लब के सदस्य रहे। इस क्लब से कई नामवर खिलाड़ी भी निकले।

राष्ट्रीय स्तर के महिला फुटबॉल प्रतियोगिता, मोइनुल हक फुटबॉल प्रतियोगिता व कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में रेफरी की भूमिका में पहचान बनाने वाले नरसिंह प्रसाद यादव इसी क्लब के खिलाड़ी रहे। नरसिंह प्रसाद यादव ने संयुक्त चंपारण टीम का प्रतिनिधित्व मोइनुल हक राज्य फुटबॉल प्रतियोगिता में किया। आज जो बिहार में महिला फुटबॉल तरक्की की राह पर है उसका श्रेय नरसिंह प्रसाद यादव को भी जाता है।

महिला फुटबॉल में अर्जुन विक्रम शाह ने इंडिया एकादश ए और इंडिया एकादश बी टीम का प्रदर्शनी मैच रामनगर में कराया। बिहार के मशहूर फुटबॉल टूर्नामेंट में एक प्रिंस मोहन विक्रम शाह फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन अर्जुन विक्रम शाह ने वर्ष 1976 से 1996 तक किया। पटना ट्रांसपोर्ट की टीम इस आखिरी टूर्नामेंट का विजेता बना जब उसने फाइनल में दुर्गा हिंद क्लब सीवान को पराजित किया। यह टूर्नामेंट आज किसी कोने में पड़ा दिन गिन रहा है। आकाशवाणी पटना द्वारा इस टूर्नामेंट का कई वर्षों तक फाइनल मैच का रनिंग कमेंट्री प्रसारित किया जिसमें जाने-माने बिहार के कमेंटेटर स्व. डॉ प्रेम कुमार, स्व. डॉ समीर सेन गुप्ता, बद्री प्रसाद यादव एवं बिहार फुटबॉल संघ के पूर्व सचिव सैयद एजाज हुसैन शामिल थे।

अर्जुन विक्रम शाह पश्चिम चंपारण फुटबॉल संघ के सचिव आजीवन रहे। इस दौरान बेतिया महाराजा स्टेडियम की तरक्की और राज्य व राष्ट्रीय स्तर के पुरुष व महिला फुटबॉल मैच का आयोजन करवाया। मोइनुल हक राज्य फुटबॉल प्रतियोगिता व बिहार राज्य अंतर क्लब फुटबॉल प्रतियोगिता का भी आयोजन उन्होंने कई बार किया।


मोतिहारी के नेहरु स्टेडियम के निर्माण के लिए अपने मंत्रालय से दो लाख रुपए का चेक प्रदान किया था। अर्जुन विक्रम शाह बिहार स्पोट्र्स काउंसिल के चेयरमैन, बिहार ओलंपिक संघ के अध्यक्ष, बिहार फुटबॉल संघ के अध्यक्ष, बिहार हॉकी संघ के अध्यक्ष व बिहार टेबुल टेनिस सनघ के भी अध्यक्ष रहे। वे भारतीय ओलंपिक संघ के भी पदधारी रहे। तीन-चार देशों का भ्रमण भी खेल अधिकारी के रूप में किया। भारतीय ओलंपिक संघ का प्रतिनिधि बन कर वे जापान गए।


अर्जुन विक्रम शाह बिहार फुटबॉल संघ के पूर्व सचिव, बिहार ओलंपिक संघ के पूर्व सचिव समेत कई खेल संघों से जुड़े स्व. सैयद एजाज हुसैन से घनिष्ठ संबंध थे। इन दोनों ने मिल कर बिहार के खेल को आगे बढ़ाया।


भारतीय महिला फुटबॉल महासंघ (जैदी साहब) व नेशनल स्पोट्र्स एकेडमी के द्वारा श्रीमती चंद्रा त्रिपाठी अवार्ड से लखनऊ में उन्हें नवाजा गया था। उनके साथ यह अवार्ड अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटर बद्री प्रसाद यादव को मिला था। इसके पहले यह अवार्ड वरिष्ठ खेल पत्रकार व अंतरराष्ट्रीय आंकड़ेबाज मोहम्मद ईशाउद्दीन को भदेश्वर (पश्चिम बंगाल) में मिल चुका है।

अर्जुन विक्रम शाह की न केवल खेल बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों में रूचि थी। बिहार सांस्कृतिक टीम का अगुआ बन कर मॉरीशस गये। अर्जुन विक्रम शाह ने रामनगर में देश के नामी-गिरामी शास्त्रीय सुगम संगीत, आर्केस्ट्रा, कब्बाली, लोकगीत कलाकारों तथा प्रतिष्ठित कवियों को भी बुलाया। जिसके कारण रामनगर की चर्चा बिहार में होती रही। रामनगर में महंत धनराजपुरी, सरयुग सिंह सुंदर, एंथोनी दीपक, ई आनंद किशोर मिश्रा एवं एस.एस फरीदी जैसे कवि साहित्यकार, कलाकार और आयोजक बिहार के मानचित्र पर आये।
पश्चिम चंपारण साहित्य सम्मेलन के पूर्व प्रधान व श्रमिक नेता गिरीन्द्र किशोर मिश्रा अर्जुन विक्रम शाह के काफी करीबी रहे। राजनीति, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में कुमार साह को काफी सहयोग करते रहे।


अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सह मुशायरा के बिहार में ख्याति प्राप्त संयोजक, आयोजक पश्चिमी चंपारण हिंदी साहित्य सम्मेलन के कर्ताधर्ता, गंगा-यमुनी तहजीव के हस्ताक्षर ई आनंद किशोर मिश्रा जो अर्जुन विक्रम शाह के प्रकटीकरण के रूप में आज चंपारण व बिहार में मुल्क के नामवर अंतरराष्ट्रीय शायरों व कवियों को बुला कर दम तोड़ते हुए साहित्य-अदब के सन्नाटे को ऑक्सीजन व टॉनिक देने का काम किया। आनंद किशोर मिश्रा ने कुमार साहब को बिहार के सांस्कृति पुरुष व खेल आयोजन का पर्याय बताया।


बिहार के पूर्व संतोष ट्रॉफी खिलाड़ी सह अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटर आकाशवाणी पटना के पूर्व उद्घोषक व खेल पत्रकार बद्री प्रसाद यादव ने बताया कि अर्जुन विक्रम शाह को खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों में अभिरुचि व अहमियत को देखते हुए बिहार सरकार ने कला, सांस्कृतिक व युवा कल्याण मंत्रालय का गठन 1985 में किया जिसके कारण पहला खेल मंत्री अर्जुन विक्रम शाह बने।

आकाशवाी के कभी चर्चित कलाकार रहे एसएस फरीदी ने बताया कि अर्जुन विक्रम शाह के जमाने में रामगनर का अतीत जितना गौरवशाली था वर्तमान ही ग्लैमर की चमक में खोया। उल्लेखनीय है कि एसएस फरीदी अस्सी के दशक में आकाशवाणी पटना के उर्दू कार्यक्रम के लतीफों की महफिल, मेहनतकश ईद की तैयारी बाजार की खरीदारी, नाटक जैसे कार्यक्रम कर रामनगर को ऊचाईयां दी। वर्तमान में एस.एस फरीदी कौमी तंजीम उर्दू दैनिक अखबार पटना में कार्यरत हैं।


कुमार साहब के नाम से प्रसिद्ध अर्जुन विक्रम शाह चाहते तो राजनीति के सांप-सीढ़ी खेल के माहिर हो जाते। पाला बदलकर विधायक और मंत्री कई बार बन जाते, किंतु ऐसा उन्होंने नहीं किया। पूरा जीवन कांग्रेस के लिए समर्पित किया। उन्होंने अपनी अभिरुचि खेल और कला मंच में दिखाई। वे तीन बार विधायक बने।


बहरहाल बिहार के खेल व सांस्कृति विकास में अर्जुन विक्रम शाह का योगदान किसी से कम नहीं है। मगर उनके इस दुनिया से अलविदा होने के नौ साल बीत जाने के बाद बिहार खेल जगत उन्हें याद नहीं करता है। देश के मशहूर शायर शाद अजीमाबादी ने ठीक ही कहा था ‘ मैं हीरा था तेरे दाम में ये बिहार, तू मेरी कीमत न दे सका।

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