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8 मई को पूरा किया था 100 वां प्रथम श्रेणी शतक, कुल मिला कर बनाए थे 199 शतक,जानें कौन थे वह

मोहम्मद अफरोज उद्दीन
जैक हॉब्स दुनिया के सबसे ज्यादा प्रथम शतक बनाने वाले बल्लेबाज और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले क्रिकेटर हैं। हालांकि अब वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इंग्लैंड का यह खिलाड़ी है आज भी दुनिया के सबसे नामी खिलाड़ियों में से एक हैं। आज से 97 साल पहले इस खिलाड़ी ने वह कारनामा कर दिखाया था जिसका मुकाबला उस समय तक किसी ने नहीं किया था। इसके बाद शतकों का शतक लगाने वाले कई खिलाड़ी सामने आए लेकिन जैक हॉब्स इन सब में अव्वल हैं। जैक हॉब्स ने कुल मिलाकर 199 शतक जमाए और 61760 रन अपने खाते में जोड़े। यह ऐसा आंकड़ा है जिसे छू पाना अगले कई दशकों तक आसान नहीं होगा।

आज 8 मई को पूरी दुनिया में जैक हॉब्स का नाम सम्मान के साथ इसलिए लिया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने 1923 में आज ही के दिन प्रथम श्रेणी मैचों में अपना 100वां शतक पूरा किया था। अगर शतकों की सूची देखें तो हॉब्स के अलावा पेट्सी हेंद्रेन के 170, वॉली हैमंड के 167, फिल मीड के 153 और ज्यॉफ बॉयकॉट के 151 शतक हैं। भारत का कोई भी खिलाड़ी प्रथम श्रेणी मैचों में 100 शतक नहीं लगा सका है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से जहीर अब्बास के नाम यह सम्मान हासिल है। जहीर अब्बास एशियाई उपमहाद्वीप के ऐसे एकमात्र खिलाड़ी हैं।

8 मई 1923 की उस घटना को अगर याद करें जब जैक हॉब्स ने अपना सौवां प्रथम श्रेणी शतक पूरा किया था, तब पता चलेगा की उनकी टीम पहली पारी में पिछड़ गई थी। फिर भी उस मैच को उनकी टीम सरे ने 10 रन के मामूली अंतर से जीता था। 3 दिनों का यह मैच 5 से 8 मई 1923 तक खेला गया था, जिसमें दूसरे दिन का खेल विश्राम का शामिल था। उस मैच में जैक हॉब्स पहली पारी में शून्य पर आउट हो गए थे, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 116 रन बनाए थे। यही शतक आज के दिन यादगार बन गया। उस मैच में सरे ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 91 रन बनाए थे। एकमात्र खिलाड़ी डूकैत 52 रन पर नाबाद थे, जबकि बाकी के बल्लेबाज दोहरे अंक तक नहीं पहुंच पाए थे। जवाब में विपक्षी टीम समरसेट केवल 140 रन पर आउट हो गई थी। इसमें सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर 39 रन था। सरे ने अपनी दूसरी पारी 5 विकेट पर 216 रन बनाकर घोषित कर दी थी, जिसमें हॉब्स के 116 रन और हिच्ट के 67 रन शामिल थे। जीत के लिए दूसरी पारी में समरसेट को ज्यादा बड़ा लक्ष्य नहीं मिला था, लेकिन पूरी टीम 157 रन पर सिमट गई थी। इस पारी में किसी बल्लेबाज का उच्चतम स्कोर केवल 26 रन था। इस तरह सरे ने यह मैच 10 रन से जीत लिया था।

जैक हॉब्स की पत्नी और बेटा

जैक हॉब्स कितने विस्फोटक बल्लेबाज थे इसका इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने 8 मई 1923 को 40 साल की उम्र में अपना 100वां शतक पूरा किया था तब इसके बाद 1934 तक 51 साल की उम्र तक उन्होंने 99 शतक और ठोक दिए थे। इस तरह उन्होंने कुल 199 प्रथम श्रेणी शतक बनाए जिसे आज किसी के लिए छू पाना मुश्किल दिख रहा है।

वैसे शुरुआती दौर में जैक हॉब्स के शतकों की संख्या को लेकर पूरी दुनिया में असमंजस की स्थिति थी। क्रिकेट की खाता बही रखने वालों के बीच 197 और 199 शतकों का ब्यौरा आ रहा था। कोई कह रहा था कि उनके 197 शतक हैं तो कोई कह रहा था 199 शतक।

ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा था, क्योंकि 1930-31 में जैक हॉब्स ने महाराजा कुमार ऑफ विजयानगरम एकादश की ओर से भारत और सिलोन (अब श्रीलंका) की यात्रा की थी। उस दौरे पर उन्होंने कोलंबो में दो शतक भी जमाए थे और कुल मिलाकर 593 रन बनाए थे। जिस समय यह दौरा हुआ था उस समय इसे प्रथम श्रेणी का दर्जा नहीं समझा जा रहा था। लेकिन कई वर्षों बाद इन मैचों को प्रथम श्रेणी मान लिया गया जिसके बाद जैक हॉब्स के शतकों की संख्या 199 पहुंच गई।

भारत के क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि महाराजा कुमार ऑफ विजयनगरम भारत में पैदा हुए और यही उनका निधन भी हुआ। लेकिन उन्होंने इंग्लैंड की ओर से टेस्ट मैच खेला। बाद में वह बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रहे। उन्हीं के नाम पर भारत में विजी ट्रॉफी भी आयोजित होती हैं जिसमें यूनिवर्सिटी क्रिकेटर इंटर जोनल चैंपियनशिप में भाग लेते हैं।

जैक हॉब्स का जन्म 16 दिसंबर 1882 को एक गरीब परिवार में हुआ था। उनका निधन 21 दिसंबर 1963 को 81 साल की उम्र में हो गया था। वह दाएं हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज थे और कभी कभार दाएं हाथ से मध्यम तेज गति के गेंदबाजी भी करते थे। इंग्लैंड में सरे काउंटी के लिए उन्होंने 1905 से 1934 तक भाग लिया। इंग्लैंड की ओर से उन्होंने 1908 से लेकर 1930 तक 61 टेस्ट मैच खेले और 15 शतक जमाए। टेस्ट में जहां उनका उच्चतम स्कोर 216 रन था वहीं प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 316 नाबाद उनका उच्चतम स्कोर था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 108 विकेट लेने के अलावा जैक हॉब्स ने 342 कैच भी पकड़े। मजे की बात है कि अपने पहले प्रथम श्रेणी मैच में 88 रन बनाने के बाद अगले ही मैच में उन्होंने शतक जमा दिया था। इसी तरह टेस्ट मैच में भी उन्होंने पहले मैच में 83 रन की पारी खेली थी।

उनका असली नाम जॉन बेरी हॉब्स था लेकिन वह जैक हॉब्स के रूप में मशहूर हो गए। उनकी ख्याति ‘दी मास्टर’ के रूप में आज भी बरकरार है। 1953 में उन्हें नाइटहुड की उपाधि दी गई, हालांकि उन्होंने पहले इसे लेने से इनकार कर दिया था। क्रिकेट से रिटायर होने के बाद उन्होंने खेलों के सामान की दुकान खोली और जीवन के आखिरी समय तक इसे कायम रखा। उनकी पत्नी एडा थीं जिनके साथ उनका जीवन 56 साल तक चला।

जैक हॉब्स उन क्रिकेटरों में शामिल हैं जिनको प्रथम विश्व युद्ध में सेवा देने का मौका मिला था। जैक हॉब्स ने रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स के लिए एयर मैकेनिक के रूप में विश्व युद्ध में काम किया था। विश्व युद्ध के कारण है कई साल के लिए उनको क्रिकेट छोड़ना पड़ा था क्योंकि तब क्रिकेट हो ही नहीं रहा था। अगर उस समय क्रिकेट होता रहता तो जाहिर है आज उनके रनों की संख्या और शतकों की गिनती कहीं ज्यादा होती।

जैक हॉब्स के शतकों के शतक का आज 97 साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में इस खिलाड़ी को सम्मान के रूप में याद किया जाना चाहिए। उनकी एक काबिलियत यह भी थी कि उन्होंने तब पत्रकारिता भी की थी।

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